Edited By Niyati Bhandari,Updated: 03 Aug, 2026 10:30 AM

इस सप्ताह सेंकेनबर्ग सेंटर फार ह्यूमन इवोल्यूशन एंड पैलियोएवायरनमेंट के पुरातत्विद अलेक्जेंडडर जानास और उनके सहयोगियों ने होहले फेल्स गुफा से दो बड़ी खोजों की घोषणा की है।
ट्रयूबिंजन (विशेष) : इस सप्ताह सेंकेनबर्ग सेंटर फार ह्यूमन इवोल्यूशन एंड पैलियोएवायरनमेंट के पुरातत्विद अलेक्जेंडडर जानास और उनके सहयोगियों ने होहले फेल्स गुफा से दो बड़ी खोजों की घोषणा की है।
इसमें एक विशालकाय हाथी दांत से तराशी गई पक्षियों की छोटी मूर्तियां और गिद्ध की हड्डी से बनी एक बांसुरी है। इन कलाकृतियों का अनावरण हाल ही में जर्मनी के ब्लाउबेउरेन स्थित प्रागैतिहासिक और हिमयुक कला संग्रहालय में किया गया है।
बांसुरी इंसानों द्वारा खोजा गया सबसे पुराना वाद्ययंत्र है। इस तरह संगीत का इतिहास भी इंसानी सभ्यता जितना ही पुराना है। सबसे पुरानी बांसुरी स्लोवेनिया की दिवजे बेबे गुफा में मिली थी। इसे एक भालू की जांघ की हड्डी से निएंडरथल मानवों द्वारा बनाया गया था।
कमाल का संगीत
इंसानों का सबसे प्राचीन वाद्ययंत्र है बांसुरी। दिवजे बेबे बांसुरी के पुनर्निर्माण पर शोध करने वाले संगीतकारों ने पाया कि इस प्रागैतिहासिक वाद्ययंत्र से आधुनिक संगीत के सुर सा-रे-गा-मा निकाले जा सकते हैं। इसके छेदों की दूरी और आकार इस तरह से बनाए गए थे कि यह आज के वेस्टर्न क्लासिक या पारंपरिक संगीत की धुनों से पूरी तरह मेल खाते हैं। दिवजे बेब बांसुरी ध्वनि काफी गहरी, गूंजने वाली और भारी थी। संगीतकार ल्युबेन दिमकारोस्की ने इस बांसुरी की रेप्लिका पर प्राचीन और आधुनिक धुनें बजाईं तो इसकी आवाज गुफा के रहस्यमयी नाद जैसी सुनाई दी।
होमो सेपियन्स का बनाया वाद्य यंत्र
जर्मनी के होहले फेल्स गुफा से खोजी गई 40 हजार साल पुरानी बांसुरी आधुनिक मानव यानी होमो सेपियन्स द्वारा बनाई गई थी। इसे गिद्ध की खोखली हड्डी को मैमथ के दांत से तराश कर बनाया गया था।