Edited By Tanuja,Updated: 03 Aug, 2026 12:01 PM

ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला टालने के ट्रंप के फैसले का ईरानी मीडिया ने मजाक उड़ाया है। फार्स न्यूज एजेंसी ने इसे अमेरिका की कमजोरी बताया, जबकि ट्रंप का दावा है कि खाड़ी देशों और ईरान की अपील पर हमला रोका गया। ईरान ने इन दावों से साफ इनकार किया।
International Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने के ऐलान के बाद ईरानी मीडिया ने उन पर तीखा हमला बोला है। सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया संस्थानों ने ट्रंप के फैसले को अमेरिका की कमजोरी बताते हुए दावा किया कि वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा पाया। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने ट्रंप पर तंज कसते हुए लिखा, "बेवकूफ की हवा निकल गई।" कई अन्य ईरानी मीडिया संस्थानों ने भी कहा कि अमेरिका अब बातचीत का सहारा लेकर अपनी रणनीतिक विफलता को छिपाने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि अमेरिका ईरान पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य हमला करने की तैयारी कर चुका था।
हालांकि उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और स्वयं ईरान की ओर से तनाव कम करने की अपील के बाद उन्होंने फिलहाल हमले का फैसला रोक दिया। ट्रंप के अनुसार, खाड़ी देशों ने आशंका जताई थी कि बड़े सैन्य हमले की स्थिति में पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ सकती है, शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि इन चिंताओं को देखते हुए बातचीत को एक और मौका देने का निर्णय लिया गया।अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि ईरान ने भी हमले से बचने के लिए बातचीत की इच्छा जताई है। उनके मुताबिक संभावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी समाधान शामिल हो सकता है।
हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि तेहरान ने न तो अमेरिका से हमला रोकने की कोई अपील की और न ही किसी समझौते के लिए दबाव बनाया। ईरानी मीडिया ने ट्रंप के बयानों को "राजनीतिक प्रचार" करार देते हुए कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे हट गया और अब उसे कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहा है। इस बीच, दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर ट्रंप बातचीत और संभावित समझौते की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उसने किसी भी प्रकार का दबाव स्वीकार नहीं किया है।