Edited By Niyati Bhandari,Updated: 07 Oct, 2026 12:31 PM

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई.) से सर्वे कराने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई 30 नवम्बर तक टाल दी। इस सर्वे में उस ढांचे को शामिल नहीं किया जाना है जिसे
प्रयागराज (उ.प्र.) (एजैंसी): इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई.) से सर्वे कराने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई 30 नवम्बर तक टाल दी। इस सर्वे में उस ढांचे को शामिल नहीं किया जाना है जिसे हिंदू पक्ष ‘शिवलिंग’ और मुस्लिम पक्ष ‘फव्वारा’ बताता है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने यह आदेश तब दिया जब अदालत को बताया गया कि इसी विषय से संबंधित मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है और शीर्ष अदालत में अगली सुनवाई 17 नवम्बर को होनी है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने इसे तथा इससे जुड़े दूसरे मामलों को 30 नवम्बर के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
यह आदेश वाराणसी की अदालत में भी वादी रही राखी सिंह की ओर से दायर एक दीवानी पुनरीक्षण पर दिया गया है। यह मामला ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर वजूखाने के ए.एस.आई. से सर्वे कराने के अनुरोध से जुड़ा है। यह पुनरीक्षण वाराणसी के जिला न्यायाधीश के 21 अक्तूबर 2023 के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर किया गया था जिसमें उन्होंने ए.एस.आई. को ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर मौजूद कथित शिवलिंग को छोड़कर वजूखाना इलाके का सर्वे करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।