Edited By Niyati Bhandari,Updated: 07 Oct, 2026 12:32 PM

Vijayadashami 2026: विजयादशमी 2026 की सही तिथि को लेकर असमंजस दूर करें। जानिए आश्विन शुक्ल दशमी तिथि, 20 अक्टूबर को बनने वाला शुभ विजय मुहूर्त, रावण दहन का समय और इस पर्व का धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व।
Dussehra 2026: सनातन धर्म में आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि विशेष धार्मिक महत्व रखती है। इस रोज विजयादशमी यानी दशहरे का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का महान प्रतीक है। वर्ष 2026 में दशमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण विजयादशमी पर्व को लेकर संशय बना हुआ है। पंचांग गणना और उदयातिथि के अनुसार, इस वर्ष विजयादशमी का पर्व 20 अक्टूबर 2026 को ही मनाया जाना चाहिए। आईए विस्तार से जानें शुभ विजय मुहूर्त
Vijay Muhurat Dashami Tithi 2026 दशमी तिथि और रावण दहन के लिए शुभ विजय मुहूर्त
पंचांग गणना के अनुसार दशमी तिथि का शुभ आरंभ 20 अक्टूबर 2026 की दोपहर 12:50 बजे से होगा जो 21 अक्टूबर 2026 की दोपहर 02:11 बजे तक रहने वाला है।
विजयादशमी के दिन पूजन और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए 'विजय मुहूर्त' का विशेष महत्व माना जाता है। 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 01:59 बजे से दोपहर 02:45 बजे तक विजय मुहूर्त रहेगा। इस 46 मिनट की शुभ अवधि को विजयादशमी के दिन अत्यंत फलदायी माना गया है। इसी दिन परंपरा के अनुसार शाम के समय रावण दहन का आयोजन किया जाएगा।
शारदीय नवरात्रि के समापन होते ही दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इस दिन श्री राम ने रावण का वध कर उस पर विजय प्राप्त की थी। इसी के चलते रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की विजय का झंडा लहराते हैं। दशहरा से पहले यानि आश्विन मास की नवमी तिथि को शारदीय नवरात्रि का समापन होता है, इसलिए दशहरे के दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। कुछ लोग इसे दशहरे के नाम से जानते हैं तो कुछ लोग दशहरा कहते हैं।

प्राचीन काल से अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी का उत्सव मनाया जाता है। तो वहीं जब श्री राम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध कर दिया तो इस दिन को दशहरा के नाम से जाना जाने लगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयदशमी पर माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। महिषासुर रंभासुर का पुत्र था, जो अत्यंत शक्तिशाली था। जिसने कठोर तप करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने प्रकट होकर उसे कहा- 'हे वत्स! मृत्यु को छोड़कर, कुछ भी मांगों। जिसके बाद महिषासुर ने बहुत सोच-विचार कर कहा- 'ठीक है प्रभो। आप मुझे ये वरदान दें कि किसी देवता, असुर और मानव किसी से मेरी मृत्यु न हो। केवल स्त्री के हाथ से मेरी मृत्यु निश्चित हो। ब्रह्माजी 'एवमस्तु' कहकर अंतर्ध्यान हो गए। ब्रह्मा जी से ये वर प्राप्त करने के बाद महिषासुर ने तीनों लोकों पर अपना अधिकार जमा लिया और त्रिलोकाधिपति बन गया। उसके अत्याचारों से परेशान होकर तब सभी देवताओं ने देवी भगवती महाशक्ति की आराधना की।
तब समस्त देवताओं के शरीर से एक दिव्य तेज निकलकर परम सुंदरी स्त्री प्रकट हुई थी। जिसके बाद हिमवान ने देवी भगवती को सवारी के लिए सिंह दिया तथा अन्य सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र महामाया की सेवा में प्रस्तुत किए। भगवती ने देवताओं पर प्रसन्न होकर उन्हें शीघ्र ही महिषासुर के भय से मुक्त करवाने का आश्वासन दिया। कथाओं के अनुसार देवी मां ने पूरे 9 दिन तक लगातार महिषासुर से युद्ध करने के बाद 10वें दिन उसका वध कर दिया। मान्यता है कि इसी उपलक्ष्य में विजयादशमी का उत्सव मनाया जाता है। कथाओं में वर्णन मिलता है की महिषासुर एक असुर अर्थात दैत्य था, राक्षस नहीं।
इसके अलावा विजयदशमी के दिन ही प्रभु श्रीराम और रावण का युद्ध कई दिनों तक चलने के बाद समाप्त हुआ था। श्री राम ने रावण का वध करके देवी सीता को उसकी कैद से छुड़ाया था। जिसके उपलक्ष्य में दशहरे का पर्व मनाया जाता है। बता दें रावण का वध दशमी के दिन किया गया था, रावण एक राक्षस था, असुर नहीं था। कुछ अन्य मान्यताओं के अनुसार इस दिन अर्जुन ने कौरव सेना के लाखों सैनिकों को मारकर कौरवों को पराजित किया था, जिसे अधर्म पर धर्म की जीत माना गया था।
