Edited By Niyati Bhandari,Updated: 25 Sep, 2026 11:00 AM

Pitru Paksha Rules: यदि आपके घर में बीते एक वर्ष के भीतर विवाह या उपनयन संस्कार जैसा मांगलिक कार्य हुआ है, तो पितृ पक्ष में पिंडदान और तर्पण के नियम जान लें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानें क्या करें और क्या न करें।
Shraddh rules: हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष में पूर्वजों और पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण एवं भोजन अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए श्राद्ध कर्म से पितर तृप्त होते हैं। हालांकि, जिन परिवारों के घर में हाल ही में कोई शुभ या मांगलिक कार्य संपन्न हुआ होता है, उनके मन में यह संशय रहता है कि उन्हें श्राद्ध करना चाहिए या नहीं। सालभर के भीतर मांगलिक कार्य हुआ है तो न करें ये काम।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जिन परिवारों में पिछले एक वर्ष के भीतर विवाह या उपनयन संस्कार जैसे बड़े मांगलिक कार्य संपन्न हुए हैं, उन्हें पितृ पक्ष के दौरान पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध का भोजन अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही, ऐसे परिवारों को श्राद्ध कर्म के दौरान सिर मुड़ाने (मुंडन) की परंपरा का पालन भी नहीं करना है और न ही प्रतिदिन ग्रास निकालने की आवश्यकता होती है।

मांगलिक कार्य के बाद क्यों आवश्यक नहीं है श्राद्ध?
इसके पीछे का शास्त्रीय कारण यह है कि जब भी घर में कोई बड़ा मांगलिक कार्य आयोजित किया जाता है, तब पितरों को भी विधि-विधान से आमंत्रित किया जाता है। उस मांगलिक अनुष्ठान के दौरान पितरों की आत्माएं उससे जुड़ती हैं और हमारी सेवा व आदर से तृप्त हो जाती हैं। चूंकि मांगलिक कार्य के समय पितरों की तृप्ति पहले ही हो चुकी होती है, इसलिए उसी वर्ष पितृ पक्ष में पुनः श्राद्ध कर्म की आवश्यकता नहीं मानी जाती।

पितरों के प्रति श्रद्धा जताने का सरल विकल्प
मांगलिक कार्य वाले परिवारों के लिए पिंडदान और तर्पण वर्जित होने के बावजूद, माता-पिता व पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए शास्त्रीय उपाय बताया गया है।
अमावस्या पर अन्न दान: आप सर्वपितृ अमावस्या के दिन ब्राह्मणों को भोजन करा सकते हैं या फिर अन्न का दान कर सकते हैं। इस प्रकार शास्त्रों के नियमों का पालन करते हुए पितरों के प्रति अपना आदर और आभार प्रकट किया जा सकता है।
