Edited By Sarita Thapa,Updated: 09 Oct, 2026 08:32 AM

संभल के रजपुरा क्षेत्र में बुधवार को 74 वर्षीय रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा अनोखी रही। मां से गहरा लगाव रखने वाले उनके 2 पालतू हाथी परमा और मोहन भी अर्थी के पीछे अंतिम यात्रा में शामिल हुए। करीब 15 किलोमीटर लंबी यात्रा में 12 गांवों से लगभग 1500 लोग...
संभल (इंट.): संभल के रजपुरा क्षेत्र में बुधवार को 74 वर्षीय रामबेटी देवी की अंतिम यात्रा अनोखी रही। मां से गहरा लगाव रखने वाले उनके 2 पालतू हाथी परमा और मोहन भी अर्थी के पीछे अंतिम यात्रा में शामिल हुए। करीब 15 किलोमीटर लंबी यात्रा में 12 गांवों से लगभग 1500 लोग पहुंचे। आगे हाथी और पीछे सैंकड़ों ट्रैक्टरों का काफिला चल रहा था। साथ में भगवान शिव और श्री कृष्ण की झांकी भी निकाली गई।
ब्यौरा गांव निवासी रामबेटी देवी की बुधवार तड़के मौत हो गई थी। 3 दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अलीगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोनों बेटों मनवीर और चरण सिंह ने मां को विशेष सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला किया।
मनवीर ने बताया कि परिवार 200 साल से अधिक समय से हाथी पालता आ रहा है। वर्ष 2012 में पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां ही दोनों हाथियों की देखभाल करती थीं। परिवार के मुताबिक, मां की मौत के बाद से दोनों हाथी गुमसुम हैं और उन्होंने खाना-पीना भी कम कर दिया है। अंतिम यात्रा बबराला से होते हुए राजघाट गंगा तट पहुंची। हाथियों और वाहनों के काफिले के कारण बबराला में कुछ देर जाम भी लगा।
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