Edited By Sarita Thapa,Updated: 10 Oct, 2026 11:01 AM

सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का बहुत खास महत्व है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित है। इन नौ दिनों में भक्त माता रानी की विधि-विधान से पूजा करते हैं, घरों में घटस्थापना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
Shardiya Navratri 2026 Puja Samagri List : सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का बहुत खास महत्व है। यह पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना को समर्पित है। इन नौ दिनों में भक्त माता रानी की विधि-विधान से पूजा करते हैं, घरों में घटस्थापना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। माना जाता है कि नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना और पूजा की जरूर सामग्री पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है। कुछ ऐसी वस्तएं भी हैं, जिन्हें मां दुर्गा की पूजा में विशेष स्थान दिया जाता है। तो आइए जानते हैं कि नवरात्रि में पूजा के समय किन चीजों को अपने मंदिर में रखन चाहिए ऐर उनका क्या धार्मिक महत्व है।
मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर
नवरात्रि की पूजा के लिए सबसे पहले मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को साफ स्थान पर स्थापित करें। माता रानी के नौ स्वरूपों की आराधना इन नौ दिनों में विशेष रूप से की जाती है। पूजा स्थल पर माता की तस्वीर रखने से भक्तों को श्रद्धापूर्वक पूजा करने में सुविधा होती है। प्रतिमा स्थापित करते समय स्थान की स्वच्छता का ध्यान रखें।
कलश और नारियल
नवरात्रि में घटस्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए मिट्टी या धातु का कलश, जल, आम या अशोक के पत्ते और नारियल जैसी सामग्री रखी जाती है। कलश को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में विधि के अनुसार घटस्थापना की जाती है। इसकी विधि परिवार की परंपरा और प्रचलित धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
लाल चुनरी और लाल फूल
मां दुर्गा की पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त माता रानी को लाल चुनरी, लाल फूल और लाल वस्त्र अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपरा में लाल रंग को शक्ति, ऊर्जा और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। पूजा के लिए ताजे फूलों का इस्तेमाल करना अच्छा माना जाता है।
दीपक और घी
नवरात्रि में मां दुर्गा की आरती और पूजा के दौरान दीपक जलाने की परंपरा है। दीपक को प्रकाश, सकारात्मकता और अज्ञान के अंधकार को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार घी या तेल का दीपक जलाते हैं। दीपक रखते समय आसपास ज्वलनशील वस्तुएं न रखें और अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।
रोली, कुमकुम और अक्षत
मां दुर्गा की पूजा में रोली, कुमकुम और अक्षत यानी साबुत चावल का इस्तेमाल किया जाता है। इनका प्रयोग तिलक लगाने और पूजा की विभिन्न विधियों में होता है। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें शुभता और मंगल भाव से जोड़ा जाता है। पूजा की थाली में इन सामग्रियों को पहले से व्यवस्थित करके रखना सुविधाजनक रहता है।
फल और मिठाई का भोग
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा को फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जाता है। कुछ भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और अपनी परंपरा के अनुसार माता को भोग लगाते हैं। पूजा में मौसमी फल रखना भी अच्छा विकल्प है। भोग तैयार करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें और प्रसाद को श्रद्धापूर्वक परिवार तथा अन्य लोगों में बांटें।
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