घर में सुख-समृद्धि और शांति चाहते हैं तो चातुर्मास में जरूर अपनाएं ये खास उपाय

Edited By Updated: 19 Jul, 2026 11:19 AM

vastu tips for chaturmas

हिंदू धर्म में चातुर्मास का बहुत खास महत्व है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से शुरू होकर कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक चलने वाले इन 4 महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं।

Vastu tips for Chaturmas : हिंदू धर्म में चातुर्मास का बहुत खास महत्व है। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से शुरू होकर कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक चलने वाले इन 4 महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। इस चार माह के दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। माना जाता है कि इस समय घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बहुत बढ़ जाता है। इस नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा पाने के लिए  वास्तु शास्त्र में कुछ खास उपाय बताए गए हैं। अगर आप भी चातुर्मास के दौरान घर में सुख-समृद्धि और शांति चाहते हैं, तो आइए जानते हैं कि है कि चातुर्मास के दौरान कौन से खास उपाय करने चाहिए। 

नमक का पोछा लगाएं
वास्तु के अनुसार, पानी में थोड़ा नमक डालकर पोछा लगाने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। ऐसा करने से चातुर्मास के दौरान घर में बढ़ रही अशांति और कलह- क्लेश दूर होता है। साथ ही घर में सुख-शांति का वास होता है।

तुलसी सेवा 
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में तुलसी को बहुत ही पूजनीय पौधा माना जाता है। माना जाता है कि चातुर्मास में तुलसी जी की पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय हैं। चातुर्मास के दौरान हर दिन सुबह तुलसी के पौधे को जल दें और शाम के समय तुलसी के समय घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से वास्तु दोष दूर होता है और मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में शाम के समय दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा और मां लक्ष्मी का आगमन होता है, इसलिए चातुर्मास में शाम के समय दीपक जलाएं। इसके साथ ही मुख्य द्वार पर सिंदूर या हल्दी से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती है। 

पीपल के पेड़ की पूजा
चातुर्मास में पीपल के पेड़ की सेवा करना बेहद फलदायी माना जाता है, क्योंकि पीपल में त्रिदेव का वास माना गया है। शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और व्यापार या नौकरी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

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