फ्रांसिस हैल्जेन ने  'घोस्ट पार्टिकल' से खोले ब्रह्मांड के राज, अब मिलेगा  भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

Edited By Updated: 06 Oct, 2026 07:19 PM

francis halzen wins nobel prize in physics for work on ghost particles

बेल्जियम में जन्मे अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को 2026 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार उच्च-ऊर्जा वाले खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज और आइसक्यूब वेधशाला में योगदान के लिए दिया गया। अंटार्कटिका स्थित यह वेधशाला ब्रह्मांड के रहस्यमयी ‘घोस्ट पार्टिकल’ का...

Washington:  ब्रह्मांड के उन रहस्यमयी कणों की खोज, जिन्हें वैज्ञानिक ‘घोस्ट पार्टिकल’ यानी भूत कण कहते हैं, अब दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक सम्मान तक पहुंच गई है। बेल्जियम में जन्मे अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को खगोल-भौतिकीय घटनाओं से आने वाले उच्च-ऊर्जा वाले न्यूट्रिनो की खोज और अंटार्कटिका स्थित आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में उनके योगदान के लिए 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।  स्टॉकहोम में रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने मंगलवार को 82 वर्षीय फ्रांसिस हैल्जेन को 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार का विजेता घोषित किया।

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नोबेल समिति के अनुसार, हैल्जेन ने उस अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग टीम का नेतृत्व किया जिसने ब्रह्मांड को समझने के लिए एक बेहद शक्तिशाली उपकरण तैयार किया।भौतिकी के लिए नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पीयर्स ने कहा कि हैल्जेन की लगन और वैज्ञानिक दूरदृष्टि ने खगोल विज्ञान की एक नई शाखा का रास्ता खोला है।हैल्जेन ने इटली से नोबेल समिति के साथ फोन पर बातचीत में पुरस्कार मिलने पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बहुत बड़ा आश्चर्य है और उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने माना कि पहले से उनके नोबेल जीतने की अटकलें लगाई जाती रही थीं, लेकिन घोषणा के बाद उन्हें बेहद अच्छा महसूस हुआ।

 

क्या हैं न्यूट्रिनो?
न्यूट्रिनो बेहद सूक्ष्म ब्रह्मांडीय कण हैं। इनका द्रव्यमान बहुत कम होता है और ये सामान्य पदार्थ के साथ बेहद कमजोर तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं। सूर्य जैसे तारों समेत ब्रह्मांड में होने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं से बड़ी संख्या में न्यूट्रिनो पैदा होते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, हर सेकंड खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर से होकर गुजरते हैं, लेकिन हमें इसका एहसास तक नहीं होता। इसी वजह से इन्हें अक्सर ‘घोस्ट पार्टिकल’ कहा जाता है। इन कणों को सीधे आंखों से देखना संभव नहीं है। वैज्ञानिक विशेष उपकरणों के जरिए यह पता लगाते हैं कि जब कोई न्यूट्रिनो किसी दूसरे कण से टकराता है तो उससे किस तरह का संकेत या चमक पैदा होती है।

 

ब्रह्मांड के 'संदेशवाहक' क्यों हैं न्यूट्रिनो?
हैल्जेन ने न्यूट्रिनो के उस दुर्लभ समूह का अध्ययन किया जो बेहद ऊर्जावान खगोलीय घटनाओं से धरती तक पहुंचते हैं। वैज्ञानिक इन्हें ब्रह्मांड के संदेशवाहक मानते हैं, क्योंकि ये दूर-दराज की खगोलीय घटनाओं के बारे में ऐसी जानकारी लेकर आ सकते हैं, जिसे प्रकाश या अन्य पारंपरिक माध्यमों से हासिल करना मुश्किल है।इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलती है कि ब्रह्मांड में अत्यधिक ऊर्जा वाली घटनाएं कैसे होती हैं और ब्रह्मांड का विकास किस तरह हुआ।हैल्जेन के शोध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला है। यह अंटार्कटिका में दक्षिणी ध्रुव के पास बर्फ के भीतर स्थापित एक विशाल वैज्ञानिक वेधशाला है, जिसे विस्कॉन्सिन-मैडिसन विश्वविद्यालय के नेतृत्व में विकसित किया गया। दक्षिणी ध्रुव पर न्यूट्रिनो का पता लगाने से जुड़ा हैल्जेन का शोध 1980 के दशक में शुरू हुआ था। आइसक्यूब जैसी वेधशाला ने वैज्ञानिकों को बेहद ऊर्जावान न्यूट्रिनो के संकेत पकड़ने और उनके संभावित ब्रह्मांडीय स्रोतों का अध्ययन करने में नई क्षमता दी।

 

1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर की पुरस्कार राशि
2026 के नोबेल पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर निर्धारित की गई है, जो लगभग 12 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर है। यह राशि पुरस्कार किसी एक व्यक्ति, छोटे समूह या संगठन को दिए जाने की स्थिति में निर्धारित पुरस्कार राशि है। पिछले वर्ष भौतिकी का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को उप-परमाण्विक कणों के ‘क्वांटम टनलिंग’ से जुड़े शोध के लिए दिया गया था। उनके काम ने एमआरआई जैसी तकनीकों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

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