चीनी अंतरिक्ष यात्रियों का पहली बार लैब मॉड्यूल में प्रवेश

Edited By PTI News Agency,Updated: 26 Jul, 2022 09:34 AM

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बीजिंग, 25 जुलाई (भाषा) चीन के निर्माणाधीन अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद उसके तीन अंतरिक्ष यात्री सोमवार को पहली बार कक्षा में स्थापित लैब मॉड्यूल में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गए। आधिकारिक मीडिया की खबर में यह जानकारी दी गई है।

बीजिंग, 25 जुलाई (भाषा) चीन के निर्माणाधीन अंतरिक्ष स्टेशन में मौजूद उसके तीन अंतरिक्ष यात्री सोमवार को पहली बार कक्षा में स्थापित लैब मॉड्यूल में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गए। आधिकारिक मीडिया की खबर में यह जानकारी दी गई है।

चीन ने वेंटियन नामक अपनी अंतरिक्ष प्रयोगशाला रविवार को प्रक्षेपित की। चीन देश के अब तक के सबसे बड़े अंतरिक्ष यान को तियांगोंग नामक अंतरिक्ष स्टेशन का हिस्सा बनने के लिए पृथ्वी की कक्षा में भेज रहा है जो वर्तमान में निर्माणाधीन है।

नियोजित कक्षा में प्रवेश करने के बाद सोमवार को तड़के अंतरिक्ष स्टेशन के सामने वाले हिस्से के साथ वेंटियन मॉड्यूल को जोड़ा किया गया।

पहली बार चीन के दो 20-टन-स्तर के अंतरिक्ष यान ने कक्षा में संबद्ध होते हुए डॉकिंग प्रक्रिया का संचालन किया है। यह भी पहली बार है कि अंतरिक्ष यात्रियों के अंतरिक्ष स्टेशन में प्रवास के दौरान अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रक्रिया संपन्न हुई। ‘‘चाइना मेन्ड स्पेस एजेंसी’’ (सीएमएसए) ने आधिकारिक मीडिया को यह जानकारी दी।

समाचार एजेंसी शिन्हुआ की खबर के अनुसार, डॉकिंग के बाद, अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण कर रहे तीन अंतरिक्ष यात्रियों ने लैब में प्रवेश किया।

मिशन के योजनाकारों ने कहा कि आने वाले हफ्तों में, वेंटियन की एक रोबोट उपकरण के माध्यम से जगह बदली जाएगी और नयी जगह पर आने के बाद यह वहीं रहेगी तथा दीर्घकालिक संचालन के लिए तैयार होगी।

चाइना डेली की खबर में बताया गया है कि नया लैब मॉड्यूल कोर मॉड्यूल के बैकअप और एक शक्तिशाली वैज्ञानिक प्रयोग मंच के रूप में काम करेगा।

काफी निचली कक्षा में चीन के अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण पूरा होने पर वह एकमात्र देश होगा जिसके पास खुद का अंतरिक्ष स्टेशन होगा। रूस का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) कई देशों की एक सहयोगी परियोजना है।

चीनी अंतरिक्ष स्टेशन (सीएसएस) के रूस द्वारा निर्मित आईएसएस के प्रतिस्पर्धी होने की उम्मीद है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि सीएसएस आने वाले वर्षों में आईएसएस के सेवानिवृत्त होने के बाद कक्षा में बने रहने वाला एकमात्र अंतरिक्ष स्टेशन बन सकता है।

चीन के निर्माणाधीन अंतरिक्ष स्टेशन की महत्वपूर्ण विशेषता इसकी दो रोबोटिक भुजाएं हैं, जिनकी लंबाई को लेकर अमेरिका ने चिंता व्यक्त की है, क्योंकि ये रोबोटिक भुजाएं अंतरिक्ष के उपग्रहों सहित अन्य वस्तुओं को पकड़ने में सक्षम हैं। चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष इंजीनियरिंग कार्यालय (सीएमएसईओ) के अनुसार 10 मीटर लंबी भुजा ने पहले एक परीक्षण में 20 टन वजनी तियानझोउ-2 मालवाहक विमान को सफलतापूर्वक पकड़कर उसे खींच लिया था। 5 जून को कक्षा में भेजे गए तीनों अंतरिक्ष यात्री अपने छह महीने के अंतरिक्ष मिशन में मॉड्यूल को जोड़ने में मदद करेंगे।

कक्षा में अपने प्रवास के दौरान, वे तियानझोउ-5 कार्गो क्राफ्ट और शेनझोउ-15 क्रूड स्पेसशिप डॉक को कोर मॉड्यूल के साथ जुड़ते हुए भी देखेंगे। फिर, वे पृथ्वी पर लौटने से पहले अंतरिक्ष यात्रियों के अगले बैच के साथ रहेंगे और काम करेंगे।



यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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