दिल्ली शराब घोटाले में के. कविता को जमानत की याचिका खारिज, कोर्ट ने सुनाया फैसला

Edited By Mahima,Updated: 08 Apr, 2024 11:27 AM

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दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार BRS नेता के. कविता की जमानत  अंतरिम जमानत याचिका पर आज राउज एवेन्यू कोर्ट फैसला सुना दिया है। अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

नेशनल डेस्क: दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार BRS नेता के. कविता की जमानत  अंतरिम जमानत याचिका पर आज राउज एवेन्यू कोर्ट फैसला सुना दिया है। अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। बताया जा रहा है कि कविता फिलहाल ईडी की हिरासत में ही हैं। कविता ने अपने 16 वर्षीय बेटे की चल रही परीक्षाओं का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत मांगी थ। 

सुनवाई के दौरान के. कविता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने पीएमएलए की धारा 45 और एक प्रावधान का हवाला दिया था जो महिलाओं को अपवाद प्रदान करता है। सिंघवी ने अपनी दलील कहा था, 'ऐसा नहीं है कि बच्चा गोद में है या छोटा है, वह 16 साल का है। लेकिन यहां मुद्दा अलग है। यह एक मां का अपने बच्चे के लिए नैतिक और भावनात्मक समर्थन का मुद्दा है। उसे (के. कविता की गिरफ्तारी से उनके बेटे को) पहले ही ट्रॉमा पहुंच चुका है।'

बता दें दिल्ली शराब नीति मामले में गिरफ्तार बीआरएस नेता के. कविता की अंतरिम जमानत याचिका पर कोर्ट में 4 अप्रैल को सुनवाई हुई। इस दौरान के कविता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि आज मैं सिर्फ अंतरिम जमानत पर बहस कर रहा हूं। पिछली सुनवाई में उनके द्वारा दी गई दलीलों को मुख्य जमानत याचिका में इस्तेमाल किया जाए।  

कोर्ट में ये बोले कविता के वकील
कोर्ट में कविता के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जिरह के दौरान कहा कि आरोपी महिला का एक बच्चा है, जिसकी परीक्षाएं अप्रैल में होने वाली हैं। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण उल्लेख माना और कहा कि बच्चे की आयु 16 साल है और उसे मां का भावनात्मक समर्थन है। मां का दृष्टिकोण, पिता या बहन द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता है। एक मां के भावनात्मक समर्थन को एक मौसी द्वारा भी पूरा नहीं किया जा सकता है।

मोदी की बात का दिया हवाला 
सिंघवी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ऑल इंडिया रेडियो पर परीक्षा के दबाव को लेकर एक व्याख्यान दिया गया था, जिसमें दबाव की बात की गई थी। यह दबाव कोई काल्पनिक घटना नहीं है। अगर बेटे के साथ एक महीने तक रहने की इजाजत दे दी जाए तो कोई आसमान नहीं गिर जाएगा। ऐसी कोई तत्काल पूछताछ नहीं है जो कुछ हफ्तों तक इंतजार नहीं कर सकती है। इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भी आरोपी रिश्वत देने वाले प्रमुख लोगों के खिलाफ जांच की जा रही है। फैसले की प्रतीक्षा के दौरान, कोर्ट में गहरा सन्नाटा बना रहा। अब फिलहाल, अगले फैसले का इंतजार है। 
 

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