Edited By Mansa Devi,Updated: 25 Jan, 2026 06:45 PM

रिटायरमेंट का मतलब होता है कामकाजी जीवन से ब्रेक लेकर अपने शौक पूरे करना और परिवार के साथ समय बिताना। लेकिन ज्यादातर रिटायर्ड लोगों के लिए यह समय चिंता लेकर आता है, क्योंकि नियमित सैलरी बंद होने के बाद हर महीने खर्च कैसे चलेगा, यह सबसे बड़ा सवाल बन...
नेशनल डेस्क: रिटायरमेंट का मतलब होता है कामकाजी जीवन से ब्रेक लेकर अपने शौक पूरे करना और परिवार के साथ समय बिताना। लेकिन ज्यादातर रिटायर्ड लोगों के लिए यह समय चिंता लेकर आता है, क्योंकि नियमित सैलरी बंद होने के बाद हर महीने खर्च कैसे चलेगा, यह सबसे बड़ा सवाल बन जाता है। ऐसे में सरकार द्वारा समर्थित एक भरोसेमंद योजना की जरूरत महसूस होती है, जो निवेश सुरक्षित रखे और तय मासिक आय भी दे।
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम सुरक्षित निवेश और भरोसेमंद मासिक आय
पोस्ट ऑफिस की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम खास तौर पर 60 साल और उससे अधिक उम्र के रिटायर्ड लोगों के लिए तैयार की गई है। यह स्कीम बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होती और पैसा पूरी तरह सरकारी सुरक्षा में रहता है। फिलहाल इस योजना पर सालाना 8.2 प्रतिशत ब्याज मिलता है। एक बार अकाउंट खुल जाने के बाद पांच साल तक यह ब्याज दर स्थिर रहती है। इस स्कीम में ब्याज का भुगतान तिमाही आधार पर सीधे अकाउंट में होता है, जिससे रिटायर्ड लोगों को रेगुलर इनकम मिलती रहती है। यही वजह है कि इसे रिटायरमेंट प्लानिंग में सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।
कौन कर सकता है निवेश?
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम में सामान्य तौर पर 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोग निवेश कर सकते हैं। वहीं, वीआरएस लेने वाले लोग 55 साल की उम्र से और रक्षा सेवाओं से रिटायर हुए लोग 50 साल की उम्र से इसमें निवेश कर सकते हैं। न्यूनतम निवेश 1,000 रुपये से शुरू होता है, जबकि अधिकतम निवेश सीमा 30 लाख रुपये रखी गई है। टैक्स प्लानिंग के लिए भी यह स्कीम फायदेमंद है। धारा 80C के तहत निवेश पर 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। अकाउंट आप अपने नजदीकी पोस्ट ऑफिस या बैंक शाखा में आसानी से खुलवा सकते हैं।
कैसे बनती है 20,500 रुपये मासिक इनकम?
इस स्कीम में ब्याज तिमाही आधार पर दिया जाता है। अगर कोई निवेशक अधिकतम सीमा 30 लाख रुपये निवेश करता है, तो 8.2 प्रतिशत की दर से सालाना करीब 2,46,000 रुपये ब्याज बनता है। इसका मतलब हर तीन महीने में लगभग 61,500 रुपये सीधे अकाउंट में आते हैं। इसे महीनों में बांटकर देखें तो औसतन करीब 20,500 रुपये प्रति माह की मासिक आय बनती है। स्कीम का मैच्योरिटी पीरियड पांच साल का होता है, जिसे जरूरत पड़ने पर तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। समय से पहले निकासी का विकल्प भी उपलब्ध है, हालांकि उस पर पेनल्टी लगती है। खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में पूरी राशि नॉमिनी को मिल जाती है।