Edited By Anu Malhotra,Updated: 23 Jun, 2026 02:32 PM

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है।
नेशनल डेस्क: अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। हालांकि रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकले हैं, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। SIT के सदस्य विजय विश्वास पंत ने बताया कि जांच से जुड़े तथ्य सरकार को सौंप दिए गए हैं, लेकिन रिपोर्ट की सामग्री गोपनीय है। इसलिए फिलहाल किसी भी निष्कर्ष या सिफारिश को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
चंदे में गड़बड़ी के आरोपों के बाद बनी थी SIT
यह मामला तब चर्चा में आया जब अयोध्या के पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में आए दान में करोड़ों रुपये की अनियमितता हुई है। आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
इस बीच मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक नई याचिका दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं ने मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों, दान राशि के उपयोग और प्रशासनिक कार्यों में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। याचिका में CBI के तहत विशेष जांच दल गठित कर FIR दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही अदालत से अनुरोध किया गया है कि दान रजिस्टर, बैंक रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट, CCTV फुटेज और अन्य वित्तीय दस्तावेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं।
सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जांच के शुरुआती चरण में सबूत सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो अहम दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। याचिका में यह भी कहा गया है कि मौजूदा SIT जांच का दायरा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, इसलिए मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जा सके। फिलहाल SIT की रिपोर्ट सरकार के पास है और उसके अध्ययन के बाद ही आगे की कार्रवाई या आधिकारिक जानकारी सामने आने की संभावना है।