Edited By Tanuja,Updated: 07 Oct, 2026 12:17 PM

अमेरिका के 3 नवंबर मध्यावधि चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी दबाव में है। Reuters/Ipsos सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को 44% और रिपब्लिकन को 37% समर्थन मिला। ट्रंप की स्वीकृति दर 32% है। स्वतंत्र और हिस्पैनिक मतदाताओं में भी डेमोक्रेट्स आगे दिख...
Washington: अमेरिका में 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए नए सर्वे चिंता बढ़ाने वाले हैं। Reuters/Ipsos के ताजा सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर 44% बनाम 37% की बढ़त मिली है। ट्रंप की स्वीकृति दर भी 32% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बनी हुई है। हालांकि ये आंकड़े चुनावी नतीजे की गारंटी नहीं हैं, लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के सामने चुनौती जरूर दिखा रहे हैं।फिलहाल इतना साफ है कि 3 नवंबर का चुनाव सिर्फ कांग्रेस की सीटों का मुकाबला नहीं, बल्कि ट्रंप की नीतियों और उनके नेतृत्व के लिए भी बड़ा राजनीतिक जनमत-संग्रह जैसा परीक्षण बनने जा रहा है।
ट्रंप ने दिया ‘बड़े सरप्राइज’ का संकेत
मध्यावधि चुनाव से कुछ सप्ताह पहले ट्रंप ने एक ऐसी टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक हलकों में अटकलों को हवा दे दी है। मैरीलैंड के स्पैरोज पॉइंट में नए रक्षा निवेश से जुड़े कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि आने वाले हफ्तों में ‘बड़े सरप्राइज’ देखने को मिल सकते हैं। ट्रंप ने वहां मौजूद ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट के प्रमुख रसेल वॉट की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह देश के इतिहास के महत्वपूर्ण लोगों में शामिल हो सकते हैं और बेहतरीन काम कर रहे हैं। ट्रंप ने हालांकि यह नहीं बताया कि उनका इशारा किस संभावित घोषणा या फैसले की ओर था। इसी कार्यक्रम में नए रक्षा विनिर्माण निवेश और अमेरिकी नौसेना के लिए अरबों डॉलर के अनुबंध की भी घोषणा हुई।
रिपब्लिकन पार्टी की सबसे बड़ी चिंता
रिपब्लिकन पार्टी की चिंता सिर्फ राष्ट्रपति की लोकप्रियता तक सीमित नहीं है। चुनाव से पहले महंगाई, पेट्रोल और बिजली के बढ़ते खर्च जैसे मुद्दे मतदाताओं के लिए अहम बने हुए हैं। Reuters/Ipsos के ताजा सर्वे में महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में सबसे ऊपर रही। ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष और उससे जुड़ी ऊर्जा कीमतों ने भी आर्थिक दबाव को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियां, रोजगार, आव्रजन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नियमन जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। 5 अक्टूबर को जारी Reuters/Ipsos सर्वे के मुताबिक ट्रंप के कामकाज से सिर्फ 32% अमेरिकी संतुष्ट हैं। यह उनकी मौजूदा राष्ट्रपति अवधि में रिकॉर्ड निचली स्वीकृति दर है। यही नहीं, जब मतदाताओं से पूछा गया कि वे मध्यावधि चुनाव में किस पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन देना चाहते हैं, तो 44% ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और 37% ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया।
हिस्पैनिक मतदाताओं में भी बदला रुख
सर्वे में स्वतंत्र मतदाताओं का झुकाव भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की ओर दिखाई दिया। 37% स्वतंत्र मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि 21% ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का। हालांकि 28% स्वतंत्र मतदाता अभी भी अनिर्णीत थे। यानी चुनाव में बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता हैं जो अंतिम समय में अपना फैसला बदल सकते हैं। यही वर्ग कई करीबी सीटों पर परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है। रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक और चिंता हिस्पैनिक मतदाताओं के बीच समर्थन में गिरावट है। Reuters/Ipsos के अनुसार केवल 24% हिस्पैनिक मतदाताओं ने ट्रंप के कामकाज को मंजूरी दी। वहीं मध्यावधि चुनाव के लिए 52% हिस्पैनिक मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और 26% ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को समर्थन देने की बात कही। यह बदलाव रिपब्लिकन पार्टी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को हिस्पैनिक मतदाताओं के बीच करीब आधा समर्थन मिला था। अब इस समूह में समर्थन बनाए रखना पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।
ओहायो में विवेक रामास्वामी भी मुकाबले में पीछेो
ओहायो की गवर्नर रेस भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। हालिया Suffolk University/USA Today Network Ohio सर्वे में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन को 50% और रिपब्लिकन उम्मीदवार विवेक रामास्वामी को 41% समर्थन मिला। यह नौ अंकों का अंतर है। हालांकि अन्य सर्वेक्षणों में मुकाबला कुछ अधिक करीबी दिखा है। उदाहरण के लिए न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना के 1 अक्टूबर के सर्वे में एक्टन 49% और रामास्वामी 45% पर थे। इसलिए ओहायो की रेस को केवल एक सर्वे के आधार पर तय मानना उचित नहीं होगा। मध्यावधि चुनाव में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों प्रतिनिधि सभा और सीनेट का नियंत्रण दांव पर है। अगर डेमोक्रेट्स दोनों में पर्याप्त सीटें हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप प्रशासन को कानून पारित कराने और अपनी नीतियां लागू करने में ज्यादा राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।