UPSC Exam: बेटे के UPSC पास कराने के नाम पर पिता ने दिए 60 लाख, रिजल्ट आया तो...

Edited By Updated: 23 Sep, 2025 10:00 AM

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मुंबई में एक शख्स के साथ बड़ा धोखा हुआ, जहां उसे  UPSC Civil Services Exam पास कराने का झांसा देकर करीब 60 लाख रुपये की ठगी की गई। आरोपी ने पीड़ित के बेटे को परीक्षा में सफलता दिलाने का दावा किया और विश्वास दिलाने के लिए खुद को दिल्ली कमिश्नर और...

नेशनल डेस्क: मुंबई में एक शख्स के साथ बड़ा धोखा हुआ, जहां उसे  UPSC Civil Services Exam पास कराने का झांसा देकर करीब 60 लाख रुपये की ठगी की गई। आरोपी ने पीड़ित के बेटे को परीक्षा में सफलता दिलाने का दावा किया और विश्वास दिलाने के लिए खुद को दिल्ली कमिश्नर और यूपीएससी का प्रमुख अधिकारी बताकर गुमराह किया।

इरशाद खान, जो मालवणी में एक होटल के मालिक हैं, अपने बेटे सद्दाम खान की UPSC परीक्षा में लगातार असफलता के बाद पांचवीं बार की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच, याकूब शेख नाम का एक शख्स उनके संपर्क में आया, जो खुद को सीआईडी अधिकारी बताकर अपना प्रभाव दिखाता था। याकूब ने इरशाद से कहा कि उसके पास ऐसे लोग हैं जो उनके बेटे की परीक्षा में सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं।

कुछ समय बाद याकूब ने इरशाद का परिचय विजय चौधरी से करवाया, जिसने दावा किया कि वह रुपये लेकर यूपीएससी के रिजल्ट में हेरफेर कर सकता है। विजय ने फोन पर खुद को दिल्ली कमिश्नर और यूपीएससी का मुख्य अधिकारी बताकर इरशाद को विश्वास में लिया। इस विश्वास के चलते इरशाद ने नकद और ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से लाखों रुपये आरोपी को सौंप दिए।

हालांकि, जब परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, तो सद्दाम का रिजल्ट वैसा ही रहा जैसा पहले था। इसके बाद जब इरशाद ने दोनों आरोपियों से संपर्क किया, तो वे बहाने बनाने लगे और बेटे की असफलता के लिए उसके धर्म को जिम्मेदार ठहराने लगे। इस घटना से ठगे जाने का एहसास होते ही इरशाद ने पुलिस से संपर्क किया और शिकायत दर्ज कराई।

मालवणी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याकूब शेख को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि विजय चौधरी अभी फरार है और पुलिस उसकी खोज में जुटी हुई है। यह घटना उन परिवारों के लिए एक चेतावनी है जो अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भावुक होते हैं और ऐसे धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं।

UPSC ने भी बार-बार यह साफ किया है कि उनका चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है और इसमें किसी प्रकार की सिफारिश या रिश्वत का कोई स्थान नहीं है। ऐसे मामलों में सावधानी और जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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