Edited By Vatika,Updated: 13 Mar, 2026 09:52 AM

महानगर के औद्योगिक शहर में घरेलू और कमर्शियल गैस की भारी किल्लत के कारण हालात कुछ यूं
लुधियाना(खुराना) : महानगर के औद्योगिक शहर में घरेलू और कमर्शियल गैस की भारी किल्लत के कारण हालात कुछ यूं बने हुए हैं कि गैस सिलैंडर की सप्लाई नहीं मिलने के कारण लोग अब अपने रसोई घरों में ईंधन के रूप में लकड़ी और गोबर के उपले जलाने को मजबूर हो चुके हैं तो वहीं इंडस्ट्री, होटल रैस्टोरैंट और ढाबों आदि में खाना पकाने के लिए विकल्प के रूप में डीजल इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है।
यहां हैरानीजनक स्थिति यह है कि एक ओर जहां जिला प्रशासन महानगर में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं होने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लोगों को एक सिलैंडर भरवाने के लिए गैस एजैंसियों के कार्यालयों और गोदामों के चक्कर काट कर चप्पलें घिसाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है लेकिन बावजूद इसके अधिकतर लोगों को गैस सिलैंडर की सप्लाई नहीं मिल रही है। ऐसे में कई गैस एजैंसियों के डीलरों और कार्यालय में तैनात स्टाफ द्वारा उपभोक्ताओं के फोन तक नहीं उठाए जा रहे हैं जिसके कारण लोगों में पैनिक लगातार बढ़ता जा रहा है। महिला उपभोक्ता ने बताया कि घरेलू गैस सिलैंडर ही सप्लाई नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूरन लकड़ी के पुराने दरवाजे खरीद कर घर में रोटी-सब्जी बनाने का जुगाड़ करना पड़ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि बाजार में घरेलू गैस सिलैंडर ब्लैक में बहुत महंगा मिल रहा है जिसे खरीदना उनके बस से बाहर की बात है इसलिए उनके द्वारा बाजार से लकड़ी के पुराने दरवाजे खरीद कर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उधर विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो घरेलू गैस सिलैंडर जिसकी कंपनी द्वारा कीमत 940 रुपए निर्धारित की गई है। कई इलाकों में ब्लैक में 1800 रुपए तक बिक्री हो रहा है जबकि गैस माफिया द्वारा 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलैंडर की 3 हजार से लेकर 3500 रुपए तक में कालाबाजारी की जा रही है, जो कि इसलिए भी जांच का विषय है क्योंकि केंद्रीय पैट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा देशभर में रोजाना जरूरत की जरूरी वस्तुओं एल.पी.जी. सिलैंडर, पैट्रोल, डीजल और दवाइयां जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं पर एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट लगाया गया है जिसमें सीधे तौर पर एल.पी.जी. की कालाबाजारी और मुनाफाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का प्रावधान शामिल है। ऐसे में चिंताजनक बात यह है कि गैस माफिया को गैस सिलैंडर की सप्लाई आखिरकार कौन और कैसे दे रहा है।