मंत्रिमंडल ने हिंदुस्तान जिंक में सरकार की 29.58% हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी

Edited By PTI News Agency, Updated: 25 May, 2022 10:08 PM

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नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने हिंदुस्तान जिंक लि. (एचजेडएल) में सरकार की शेष 29.58 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचने की मंजूरी दे दी है। इस बिक्री से सरकार को करीब 38,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।

नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने हिंदुस्तान जिंक लि. (एचजेडएल) में सरकार की शेष 29.58 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचने की मंजूरी दे दी है। इस बिक्री से सरकार को करीब 38,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने बताया कि सीसीईए ने हिंदुस्तान जिंक में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री को मंजूरी दे दी है।

इस कदम से सरकार को चालू वित्त वर्ष में अपने विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश और रणनीतिक बिक्री से 65,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।

सरकार चालू वित्त वर्ष में पहले ही जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में अपनी 3.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 20,500 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।
तीन में से दो बोलीदाताओं के पीछे हटने के बाद भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) का निजीकरण रुक गया है। इसके बाद सरकार ने हिंदुस्तान जिंक के निजीकरण का फैसला किया है। इसके अलावा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के निजीकरण में भी प्रक्रियागत विलंब हो रहा है।
सूत्रों ने बताया कि 29.58 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के तहत 124.96 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। इससे मौजूदा मूल्य पर सरकार को 38,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
बीएसई में हिंदुस्तान जिंक का शेयर बुधवार को 3.14 प्रतिशत चढ़कर 305.05 रुपये पर बंद हुआ। दिन में कारोबार के दौरान यह 317.30 रुपये के उच्चस्तर तक गया था।
सरकार ने 2002 में हिंदुस्तान जिंक में अपनी 26 प्रतिशत हिस्सेदारी अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाले वेदांता समूह की स्टरलाइट को 40.5 रुपये प्रति शेयर के मूल्य पर बेची थी। एक साल बाद समूह ने सरकार से कंपनी की 18.92 प्रतिशत और हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया था। इन दो लेनदेन में सरकार को 769 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे।
अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता ने हाल में कहा था कि यदि सरकार अनुबंध की शर्तों में बदलाव नहीं करती है, तो कंपनी हिंदुस्तान जिंक में सरकार की शेष हिस्सेदारी में से सिर्फ पांच प्रतिशत ही और खरीद सकती है।

हिंदुस्तान जिंक 2002 तक सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी थी। अप्रैल, 2002 में सरकार ने हिंदुस्तान जिंक में अपनी 26 प्रतिशत हिस्सेदारी स्टरलाइट अपॉरच्यूनिटीज एंड वेंचर्स लि. (एसओवीएल) को 445 करोड़ रुपये में बेची थी। इससे वेदांता समूह के पास कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण आ गया था।
वेदांता समूह ने बाद में बाजार से कंपनी की 20 प्रतिशत और हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद नवंबर, 2003 में समूह ने सरकार से कंपनी की 18.92 प्रतिशत और हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। इससे हिंदुस्तान जिंक में वेदांता की हिस्सेदारी बढ़कर 64.92 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।


यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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