केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग ने बनाया रिकॉर्ड, 90 मिनट में सभी सीटें फुल

Edited By Updated: 25 Apr, 2026 05:16 PM

booking of kedarnath heli service made record all seats filled in 90 minutes

आईआरसीटीसी पोर्टल पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने टिकट बुक किए। गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी से संचालित यह सेवा कठिन पैदल मार्ग से राहत देती है।

Kedarnath Helicopter Booking: केदारनाथ हेलीकॉप्टर शटल सेवा की 22 अप्रैल से 15 जून के बीच उपलब्ध सभी 31,450 सीट पोर्टल खुलने के महज 90 मिनट के भीतर बुक हो गईं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। 

अधिकारियों के अनुसार, बुकिंग प्रक्रिया 15 अप्रैल को शाम छह बजे शुरू हुई और शाम सात बजकर 28 मिनट पर अंतिम टिकट जारी हुआ। इस दौरान भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के आधिकारिक पोर्टल पर कुल 10,855 टिकट बुक किए गए। हेलीकॉप्टर शटल सेवा श्रद्धालुओं को आधार शिविर से हिमालय के इस पवित्र धाम तक हवाई मार्ग से जोड़ती है। गुप्तकाशी, फाटा और सिरसी से संचालित होने वाली यह सेवा 16 किलोमीटर के दुर्गम पैदल मार्ग से राहत दिलाती है। 

उत्तराखंड पर्यटन विभाग के हेल्पलाइन नियंत्रण केंद्र ने प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए औचक रूप से 565 सत्यापन कॉल कीं। जांच में पाया गया कि बुकिंग में उपयोग किए गए 10,859 मोबाइल फोन नंबर में से 4,400 नंबर वास्तविक यात्रियों के थे। अधिकारियों ने बताया कि विश्लेषण से पता चला कि 51 प्रतिशत बुकिंग सीधे श्रद्धालुओं ने की, जबकि शेष 49 प्रतिशत अन्य अधिकृत माध्यमों से हुई। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा बुकिंग शाम 6 बजकर 10 मिनट से 6 बजकर 32 मिनट के बीच हुई। छह बजकर 10 मिनट पर 849 बुकिंग दर्ज की गईं और अगले 20 मिनट में यह संख्या तेजी से बढ़ती रही। 

राज्यवार बुकिंग में महाराष्ट्र 1,708 सफल बुकिंग के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद उत्तर प्रदेश (1,243), दिल्ली (867), तेलंगाना (864), कर्नाटक (801) और गुजरात (700) का स्थान रहा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने प्रत्येक उपयोगकर्ता को अधिकतम दो बुकिंग और 12 सीट तक सीमित रखा। एक आईपी एड्रेस से अधिकतम पांच 'यूजर आईडी' और प्रत्येक बुकिंग में अधिकतम छह यात्री ही शामिल किए जा सकते हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 510 बुकिंग आईडी की 913 सीट रद्द की जा चुकी हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस सुव्यवस्थित प्रक्रिया से सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और विश्वसनीय बनाई जा सकेगी। 

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