ऋण पुनर्गठन योजना में सुधार के लिए ऊर्जा मंत्रालय मंत्रिमंडल की मंजूरी लेगा

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Wednesday, September 11, 2013-8:53 AM

नई दिल्ली: बिजली मंत्रालय राज्य बिजली बोर्डों से जुड़ी ऋण पुनर्गठन योजना में कुछ और सुधार के लिए मंत्रिमंडल से मंजूरी की योजना पर काम कर रहा है ताकि झारखंड और बिहार समेत कुछ और इकाइयों की देनदारी को भी इसमें शामिल किया जा सके। बिजली मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के साथ 4 घंटे की बैठक के बाद आज कहा कि योजना के नियमन अथवा औचित्य में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

सिंधिया ने कहा कि बिजली मंत्रालय ने झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के राज्य बिजली बोर्डों को पिछले 3 से 6 महीने की बकाया देनदारी को शामिल करने की मंजूरी देने का भी प्रस्ताव किया है। एफ.आर.पी. के तहत ऋण बांड में बदले जाएंगे जिसे वितरण कंपनियां भागीदार ऋणदाताओं को जारी करेंगी और इसे राज्य सरकार की गारंटी मिलेगी। अनुमान है कि राज्य बिजली वितरण कंपनियों का नुक्सान 31 मार्च 2011 तक 1.9 लाख करोड़ रुपए था।

 

वहीं सरकार कुल 40,000 मैगावाट की उत्पादन क्षमता वाली पनबिजली परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के प्रयास कर रही है। ये परियोजनाएं विभिन्न स्तरों पर मंजूरियां नहीं मिलने से लंबित हैं। यह जानकारी बिजली मंत्री ने आज दी। इन परियोजनाओं के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सी.ई.ए.), केंद्रीय जल आयोग (सी.डब्ल्यू.सी.) और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय सहित विभिन्न प्राधिकरणों से मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा की जा रही है।


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