दिल्ली में डीजल बिक्री घटने से सरकार को नुकसान

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Wednesday, September 11, 2013-5:06 PM

नई दिल्ली: दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन (डीपीडीए) ने कहा है कि राजधानी के मुकाबले हरियाणा में वैट कम होने की वजह से डीजल की बिक्री पर दिल्ली सरकार को सालाना 400 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष निशित गोयल ने आज यहां कहा कि हरियाणा में डीजल पर वैट करीब नौ प्रतिशत है। इसके मुकाबले दिल्ली में डीजल पर वैट 12.5 प्रतिशत है।

इसकी वजह से ट्रक, बस और अन्य वाहन चालक दिल्ली के मुकाबले हरियाणा में डीजल खरीदने को प्राथमिकता देते हैं जिसकी वजह से पेट्रोल पंप मालिकों को नुकसान हो ही रहा है। दिल्ली सरकार को सालाना 400 करोड रुपए का घाटा उठानापड रहा है। गोयल ने कहा कि दिल्ली की तुलना में हरियाणा में डीजल करीब डेढ रुपए प्रति लीटर सस्ता है। इसकी वजह से अधिक मात्रा में डीजल खरीदने वाले दिल्ली से सटी हरियाणा की सीमा के पेट्रोल पंपों से डीजल भरवाने को तवज्जों देते हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से डीजल की बिक्री कम करने के लिए राज्य सरकार ने इस ईंधन से चलने वाले वाहनों पर अतिरिक्त कर लगाया है। किंतु डीजल पर वैट अधिक होने से सरकार की यह नीति कारगर सिद्ध नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि
दिल्ली में डीजल पर वैट अधिक होने से यहां की बिक्री में गिरावट आई है किंतु हरियाणा में डीजल की मांग छह गुना बढ गई है। हरियाणा की सीमा से सटे दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर तो डीजल की बिक्री घटकर 25 प्रतिशत ही रह गई।

गोयल ने पेट्रोल पंपों के मालिकों और राज्य सरकार को हो रहे नुकसान को देखते हुए डीजल पर वैट हरियाणा के बराबर किए जाने की मांग की है।
 

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