रैनबैकसी पर एफडीए का शिकंजा कसा, शेयर 27 प्रतिशत तक टूटे

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Monday, September 16, 2013-2:45 PM

मुंबई: ब्रिकी के लिहाज से देश में फार्म क्षेत्र की सबसे बडी कंपनी रैनबैंक्सी लैबोरेटरीज के उपर अमेरिकी नियामक खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) का शिकंजा कसने से आज शेयर बाजार में कंपनी के शेयर 27 प्रतिशत से ज्यादा लुढकर 330.50 रुपए प्रति शेयर तक उतर गए।

एफडीए ने कंपनी के मोहाली संयंत्र में दवा बनाने की प्रक्रिया तय मानकों के अनुरुप नहीं रहने का हवाला देते हुए इस संयंत्र से अमेरिका में दवाओं के आयात पर दोबारा से एलर्ट जारी किया है। अलर्ट जारी करने संबधी जानकारी एफडीए की वेबसाइट पर दी गई है। एफडीए की ओर से यह एलर्ट रैनबैक्सी द्वारा अमेरिका में 50 करोड डॉलर का जुर्माना भरने के कुछ ही महीने बाद जारी किया गया है। यह जुर्माना कंपनी को दवा बनाने के सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने के कारण भरना पडा था।

कंपनी ने मोहाली संयंत्र में बनने वाली कोलोस्ट्रोल घटाने वाली जेनरिक दवा लिपिटोर का गत वर्ष अप्रैल में अमेरिका को निर्यात करना शुरू किया था। निर्यात के छह महीने बाद ही जांच में इस दवा में शीशे के कण पाए जाने की शिकायत मिली जिस पर तत्काल इसका निर्यात रोक दिया गया और साथ ही पहले निर्यात की गई दवाओं की खेप भी अमेरिका से वापस मंगानी पडी। हालांकि कपंनी ने एफडीए की ओर से जारी आयात एलर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन बाजार के जानकारों के मुताबिक ऐसे समय जबकि मोहाली संयंत्र से दवाओं का निर्यात पहले से ही रुका हुआ है एफडीए के ताजा एलर्ट से कंपनी की वित्तीय सेहत पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पडने वाला है।

हालांकि यहां से भविष्य में दवाओं के निर्यात प्रभावित हो सकता है। भारत अमेरिका की दवाओं का निर्यात करने वाला दुनिया का सबसे बडा देश है। देश में इस समय एफडीए के मानदंडों के अनुरुप काम करने वाले 150 से ज्यादा दवा संयंत्र हैं। गत वर्ष देश से अमेरिका को कुल 4.32 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया गया।


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