रिजर्व बैंक नहीं, मुद्रास्फीति ने वृद्धि को घटाया: चक्रवर्ती

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Sunday, October 06, 2013-10:38 AM

मुंबई: ब्याज दर कम न करने के लिए कुछ हलकों में भारतीय रिजर्व बैंक की आलोचना के बीच इसके डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने कहा कि आर्थिक वृद्धि दर में गिरावट के लिए केंद्रीय बैंक को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मुद्राफीति हल्की होगी तभी आर्थिक गतिविधियों में टिकाउ ढंग से विस्तार हो सकेगा।

चक्रवर्ती ने एक मैनेजमेंट कालेज के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि  ‘आप रिजर्व बैंक पर यह तोहमत नहीं लगा सकते कि उसने वृद्धि को घटा दिया, आप यह दोष मुद्रास्फीति पर लगाएं ‘हम मुद्रास्फीति को हल्की या नीचे रखने का जो लक्ष्य ले कर चल रहे हैं उसका उद्देश्य वृद्धि को तेज करना है, न कि उसे खत्म करना।’

उन्होंने कहा कि आलोचक यह भूल जाते हैं कि ब्याज इस लिए ऊंची है क्यों कि मुद्रास्फीति ऊंची है। महंगाई कम करने के लिए आप को कम कीमत पर अधिक अनाज पैदा करना होगा। चक्रवर्ती ने कहा कि 9 प्रतिशत सालाना की आर्थिक वृद्धि तभी संभव है जबकि मुद्रास्फीति 5 प्रतिशत तक सीमित हो। गौरतलब है कि 20 सितंबर को मौद्रिक नीति की अर्धतिमाही समीक्षा में नए गवर्नर रघुराम गोविंद राजन ने रिजर्व बैंक की नीतिगत ब्याज दर रेपो में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 7.5 प्रतिशत कर दिया।

लोगों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक वृद्धि को गति देने के लिए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर में कमी कर बैंकों के लिए धन सस्ता करेगा ताकि वे कामधाम के लिए कर्ज सस्ता कर सकें। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि घट कर 4.4 पर आ गयी। कई विश्लेषकों का कहना है कि यह इस पूरे वर्ष के लिए 5 प्रतिशत से नीचे रह सकती है।


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