रेपो दर में हो सकती है बढ़ोतरी!

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Tuesday, October 08, 2013-3:15 PM

मुम्बई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तरलता बढाने के उपायों को सरल बनाने की घोषणा का अर्थशास्त्रियों ने स्वागत किया है लेकिन आरबीआई की अगले माह होने वाली छमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में उन्हें महंगाई को कम करने के लिए रेपो दर में बढोतरी किये जाने की भी उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कल बैंकिंग तंत्र में तरलता बढाने के उद्देश्य से मार्जिनल स्टैंडिग फैसिलिटी (एमएसएफ) को तत्काल प्रभाव से 0.50 प्रतिशत कम कर 9.0 प्रतिशत कर दिया।

रिजर्व बैंक ने इस संबंध में जारी बयान में कहा था कि रुपए की गिरावट को थामने के लिए जुलाई में किए गए मौद्रिक उपायों को शिथिल बनाने की प्रक्रिया चालू वित्त वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की तिमाही मध्य समीक्षा में शुरू की गयी थी और एमएसएफ को 10.25 प्रतिशत से कम कर 9.50 प्रतिशत किया गया था। बैंक आफ अमेरिका मैरिल लिंच के अर्थशास्त्री इंद्रनील सेन गुप्ता ने कहा कि जुलाई में डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट को थामने के लिए तरलता मानको को कठोर बनाये जाने के आरबीआई के फैसले ने उन्हें आशंकित कर दिया था।

हालांकि एफआईआई इक्विटी पोटफोलियों 220 अरब डॉलर का है जो 28 अरब डॉलर के एफआईआई बौंड से बहुत अधिक है और इससे ब्याज दर में बढोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि आरबीआई की तरलता बढाने के उपाय आसान करने की घोषणा के बावजूद भी ब्याज दरों में कमी आने की उम्मीद बहुत कम है। बैंकों का कुल ऋण 17 से 18 प्रतिशत की दर से बढा है लेकिन कारपोरेट क्षेत्र के कमॢशयल पेपर और डिबेंचर्स के समायोजन से कुल कर्ज में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

हालांकि कुल ऋण उठाव की वृद्धि में 11 प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद है क्योंकि ब्याज दर में कटौती की संभावना बहुत कम है। रिजर्व बैंक ने इसके अतिरिक्त तरलता बढाने के उद्देश्य से खुला खरीद परिचालन (एमपीओ) के तहत कल 9974 करोड रुपए तंत्र में डाले थे।


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