‘करंसी नोट पर आदेश का आम चुनाव से कोई लेना देना नहीं’

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Thursday, January 23, 2014-8:30 PM

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने आज कहा कि 2005 से पहले छपे नोटों को वापस लेने का आदेश विमुुद्रीकरण का प्रयास नहीं है और इसका आम चुनावों से कोई लेना देना नहीं है। गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि 2005 से पहले के नोट वैध बने रहेंगे। 

 
राजन ने कहा, ‘‘यह विमुद्रीकरण का प्रयास नहीं है। यह कम प्रभावी नोटों को अधिक प्रभावी नोटों से बदलने का प्रयास है। मैं समझ सकता हूं कि लोग इसका गलत निष्कर्ष निकाल रहे हैं।’’ 
 
रिजर्व बैंक ने कल 2005 से पहले के सभी करेेंसी नोटों को वापस लेने की घोषणा की थी। राजन 8वां आर एन काव स्मृति व्याख्यान देने के बाद सवालों के जवाब दे रहे थे। सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा ने आम चुनाव से पहले इस तरह के फैसले के बारे में पूछा था।  राजन ने कहा, ‘‘मैं कहना चाहूूंगा कि इसका चुनाव से लेनादेना नहीं है।’’ 
 
राजन ने बताया कि इस तरह की मांग लंबे समय से उठ रही थी क्योंंकि 2005 से पहले के नोट कम सुरक्षित हैं। 2005 के बाद के नोटों में सुरक्षा फीचर्स अधिक हैं। वित्त मंत्रालय चाहता है कि 2005 से पहले के नोटों को वापस लिया जाए। रिजर्व बैंक ने कल कहा था कि 31 मार्च, 2014 के बाद वह 2005 से पहले के सभी नोट बंद कर देगा। 1 अप्रैल, 2014 से लोग बैंकों से ऐसे नोटों को बदलने के लिए संपर्क कर सकेंगे।

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