जो काम मौत को दावत देने वाले विज्ञापन नहीं कर पाए, मोदी की नोटबंदी ने कर दिखाया

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Tuesday, November 22, 2016-3:55 PM

नई दिल्लीः नोटबंदी के बाद कई बिजनेस पर मंदी का असर देखने को मिल रहा है। सिगरेट के पैकेट्स पर बड़ी तस्वीर के कैंसर वाले विज्ञापनों का असर लोगों पर नहीं पड़ा, लेकिन नोटबंदी के बाद से सिगरेट की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। सिगरेट की बिक्री पर 40 फीसदी की कमी देखने को मिल रही है। सिगरेट की बिक्री में कमी की अहम वजह खुले पैसे का ना होना बताया जा रहा है।

सिगरेट की बिक्री में 40 फीसदी की कमी
चलता पान बेचने वाले किशन कुमार का कहना है कि नोटबंदी के ऐलान के बाद चार-पांच दिन तो एक भी सिगरेट की बिक्री नहीं हुई। हालांकि बिक्री में समय के साथ थोड़ी बढ़ौत्तरी हुई लेकिन अभी भी उस मात्रा में सिगरेट नहीं बिक रही है जितनी नोटबंदी के फैसले के पहले होती थी। दुकानदार का कहना है कि मेरे अनुमान से सिगरेट की बिक्री में 40 फीसदी की कमी आई है। यह किस्सा सिर्फ एक पानवाले का नहीं हैं, तकरीबन हर दुकानदार इसी संकट से गुजर रहा है।

ग्राहक करते हैं उधार की मांग
तमाम दुकानदारों का कहना है कि नोटबंदी के बाद बिक्री तकरीबन 50 फीसदी कम हो गई है। राजपुर में पान की दुकान चलाने वाले रोहन का कहना है कि तमाम पुराने ग्राहक सामान खरीदना तो चाहते हैं लेकिन वह उधार की मांग करते हैं जोकि मुमकिन नहीं है। तमाम बड़े दुकानदार भी हमें माल उधार पर देने को तैयार नहीं है। ऐसे में हमारे लिए भी सामान उधार पर खरीदने में काफी दिक्कत हो रही है, जिसके चलते बिक्री पर काफी असर पड़ रहा है।

सिगरेट पीना छोड़ने वालों के लिए कारगर फैसला 
जो लोग सिगरेट पीना छोड़ना चाहते हैं कि उनके लिए नोटबंदी का फैसला काफी कारगर साबित हो सकता है। कौलागढ़ के ललित बिष्ट का कहना है कि नोटबंदी के बाद मैं अब सिर्फ एक सिगरेट दिन में पीता हूं, उनका कहना है कि मैं इस फैसले से खुश हूं, इसी बहाने सिगरेट छोड़ने में मदद मिल सकती है।


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