सद् ग्रंथों के अनुसार, हर प्राणी नियमित रूप से करें नौ आवश्यक कर्म

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Thursday, June 08, 2017-9:29 AM

सद्ग्रंथों के अनुसार 9 ऐसे आवश्यक कर्म हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन करने चाहिएं। इन्हें 9 करणीय कर्म कहा जा सकता है-

 

संध्या- प्रात:-सायं ईशवंदना।


स्नान- शारीरिक पवित्रता एवं स्वच्छता के लिए स्नान आवश्यक है।


जप- किसी मंत्र विशेष या पवित्र वचनों का स्नान के बाद जप।


होम- देव ऋण से मुक्ति एवं पर्यावरण की शुद्धता के लिए हवन अथवा यज्ञ करना।


स्वाध्याय- ऋषि ऋण से मुक्ति या ज्ञानार्जन के लिए धर्मग्रंथों का अध्ययन।


देवपूजन- अपने आराध्य देव की पूजा।


लिवैश्वदेव- एक ऐसा यज्ञ जिसमें खाद्य पदार्थ (भात-रोट आदि) के कुछ भाग करके संक्षिप्त हवन तथा सबके निमित्त ग्रास पृथ्वी पर उनके प्राप्तकर्ताओं के निमित्त रखते हैं। इसके साथ ही पंचबलि निकाली जाती है जिसमें गौ, श्वान, काक, देवादि एवं पिपीलिका के निमित्त अन्न निकाला जाता है। बलिवैश्वदेव यज्ञ का भाग निकालते समय यदि कोई अतिथि आ जाए तो पहले उसे भोजन देना चाहिए। आशय यह है कि भोजन का सर्वप्रथम हकदार व्यक्ति है। यदि अभावग्रस्त व्यक्ति सम्मुख नहीं है, तो अन्य को मिलना चाहिए।

  
अतिथि सेवा-‘
अतिथि देवो भव’ की उक्ति इसी आवश्यक कर्म की पुष्टि करती है।


पोष्यवर्ग का भरण- माता-पिता, गुरु, दीन, अनाथ, सेवक आदि को भोजन आदि से संतुष्ट करना चाहिए।

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