बुरी आदतों और दुष्प्रवृतियों को कैसे छोड़ा जाए ?

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Wednesday, September 04, 2013-8:21 AM

बुरी आदतें अकसर दूसरों की देखा-देखी या संबध वातावरण के कारण क्रियान्वित होती और स्वभाव का अंग बनती चली जाती हैं। जिस क्रम में आदतें अपनाई जाती हैं , उसी रास्ते उन्हें छोड़ा या बदला जा सकता है। रुझान,संपर्क,वातावरण,अभ्यास आदि बदला जा सके तो कुछ दिन हैरान करने के बाद आदतें बदल भी जाती हैं।

कई बार प्रबल मनोरथ के सहारे उन्हें संकल्पपूर्वक एवं झटके से भी उखाड़ा जा सकता है पर ऐसा होता बहुत ही कम है। बाहर की अवांछनीयताओं से जूझने के तो अनेक उपाय है पर आतंरिक दुर्बलताओं से एक बार भी गुंथ जाना और उन्हें पछाड़कर ही पीछे हटना, किन्हीं मनस्वी लोगों के लिए ही संभव होता है। दुर्बल मन वाले तो छोडऩे,पछाडऩे,आगे बढऩे,पीछे हटने के कुचक्र में ही फंसे रहते हैं ...

अभीष्ट परिवर्तन न होने पर उनका दोष जिस-तिस पर मढ़ते रहते हैं, किंतु वास्तविकता इतनी ही है कि आत्मपरिष्कार के लिए सत्प्रवृतियों के अभ्यस्त बनने के लिए, सुदृढ़ निश्चय के अतिरिक्त और कोई उपाय है नहीं।

जिन्हें पिछड़ेपन से उबरने और प्रगतिशील जीवन अपनाने की वास्तविक इच्छा हो, उन्हें अपनी आदतों का पर्यवेक्षण करना चाहिए और उनमें से जो अनुपयुक्त हों, उन्हें छोडऩे, बदलने का सुनिश्चित निर्धारण करना चाहिए। स्वभाग्य निर्माता, प्रगतिशील महामानवों में से प्रत्येक को यही उपाय अपनाना पड़ता है।
                                                                                                                                                                                 - मिश्न क्रांति


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