तिरुपति बाला जी के चढ़ावे में भारी गिरावट

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Wednesday, September 04, 2013-1:28 PM

हैदराबाद: विश्व के सबसे कुलीन धार्मिक स्थल तिरुपति बाला जी में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे में भारी गिरावट की खबर है। आंध्र प्रदेश बंटवारे के विरोध में हो रहे आंदोलनों के कारण यहां स्वर्ण और रूपए-पैसे के चढ़ावे में एक तिहाई से भी अधिक की कमी आई है। आंध्र प्रदेश में वर्तमान तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक महीने में भगवान बालाजी  को समर्पित की जाने वाली 'हुंडी' 36 फीसदी गिरकर 1 करोड़ तक पहुंच गई है।

भगवान बालाजी पर प्रतिदिन चढऩे वाले चढ़ावे में कैश, गोल्ड, सिल्वर और बहुमूल्य तोहफे शामिल हैं। दर्शनों के अभिलाषी भक्तों की संख्या भी घटकर 30,000 रोजाना रह गई है। मंदिर का प्रतिदिन औसत रेवेन्यू 2.35 करोड़ रुपए है। पिछले वर्ष 1 अप्रैल को यहां एक दिन का कलेक्शन सबसे अधिक यानी 5.73 करोड़ रुपए रहा था। दसवीं शताब्दी में निर्मित भगवान बालाजी मंदिर के पास 1,000 टन गोल्ड और गोल्ड जूलरी है, जिसकी किमत लगभग 52,000 करोड़ रुपए है।

मंदिर ने टर्म डिपॉजिट के तौर पर 10,000 करोड़ रुपए बैंकों में जमा करने के साथ-साथ पूरे भारत में हजारों एकड़ की जमीन खरीद रखी है, जिसकी अनुमानित किमत 90,000 करोड़ रुपए है। राज्य के रोड ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट में तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा इलाकों के कर्मचारियों के हड़ताल करने से भक्तों को ले जाने वाली ट्रांसपोर्ट सर्विस पर असर पड़ा है। दोनों इलाकों की पहचान सीमांध्र के नाम होती है और तेलंगाना के साथ इन इलाकों को आंध्र प्रदेश के तीन इलाकों के तौर पर जाना जाता है।

कांग्रेस ने 30 जुलाई को आंध्र प्रदेश का बंटवारा करने की घोषणा की थी। इसके उपरांत राज्य को एक करने के लिए जनमानस में विरोध बढ़ गया है। पिछले हफ्ते मंदिर के कार्यकर्ता भी इस विरोध में शामिल हो गए और 48 घंटे की हड़ताल में शामिल हो गए, जिससे भक्तों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा तकरीबन 2,500 कारें सड़कों पर नहीं चलीं और दर्जनों होटल और रेस्तरां भी बंद रहे।

बालाजी मंदिर की वजह से पिछले साल आंध्र प्रदेश भारत का सबसे टॉप टूरिस्ट पलैस बनकर सामने आया है। पिछले साल यहां 20 करोड़ देसी भक्त दर्शनों के लिए आए थे। मंदिर बोर्ड के चेयरमैन के बापीराजू ने मार्च महीने में बताया था कि करेंट फिस्कल इयर में मंदिर का रेवेन्यू टारगेट 2,160 करोड़ रुपए है। इसमें भक्तों की तरफ से मिलने वाले 859 करोड़ रुपए के तोहफे भी शामिल है।


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