आधुनिकता के दौर में नवरात्रों का बदलता स्वरूप

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Wednesday, October 09, 2013-6:52 AM

आज की भागती दौड़ती और प्रतिस्पर्धा प्रधान जीवनशैली में प्रत्येक व्यक्ति के पास वक्त की कमी है। एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ और अधिक से अधिक धन कमाने की लालसा ने हसे इस हद तक स्वार्थी बना दिया है कि अपनी इच्छाओं और हितपूर्ति को अपनी प्राथमिकता मान बैठा है। जिसके चलते उसके पास अपने लिए तो क्या अपनी परंपाओं को र्निवाह करने तक का समय नहीं है।

वक्त की कमी के चलते अब नवरात्र पूजन का ट्रेंड भी बदलता जा रहा है। लोगों के पास घर पर कंजक पूजन करने के लिए समय का अभाव है इसलिए वह मंदिरों और आश्रमों में भोज्य पदार्थ दे आते हैं। कुछ लोग तो घर पर हलवा,पूरी,चने भी नहीं बनाते और बाजार से ही रेडी टू ईट सामग्री लाकर घर में पूजा करने के उपरांत कंजको में बांट देते हैं।

 दूसरी ओर दृष्टी दौड़ाएं तो समय के साथ आस्था को दिखाने के अंदाज में भी परिर्वतन आया है। उस पर भी बाजारवाद हावी हो चुका है। कुछ समय पूर्व तक कंजकों को रुमाल, लाल चुनरी, लाल चूड़ी आदि दिए जाते थे। लेकिन जिस तरह से समय अपना रूप बदल रहा है। वहीं आज उनका स्थान लंच बाक्स,रेशम के स्कार्फ, ब्रेसलेट, बालों के क्लिप, चॉकलेट, बिस्किट के पैकेट, चिप्स व प्लास्टिक की प्लेट ने ले लिया है।

 कन्या पूजन के समय कन्या को देवी का रूप मान उन्हें हलवा पूरी, काले चले, नारियल, लाल चुन्नी व लाल चूड़ी आदि भेंट किया जाता था। मान्यता है कि कन्या के माध्यम से यह सब देवी मां को अर्पित होता है।


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