जीवन में सफलता चाहिए तो सोने का तरीका बदलें

  • जीवन में सफलता चाहिए तो सोने का तरीका बदलें
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Saturday, October 26, 2013-3:14 PM
शयन कक्ष को वास्तु अनुकुल बना कर दिशाओं का सहयोग लेने से नींद की गोलियों, डिप्रैशन, कार्य की व्यस्तता, चिंताओं के बोझ आदि से बचा जा सकता है। दिशाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करने से ज्ञात होता है कि संपूर्ण पृथ्वी में चुंबकीय क्षेत्र बना हुआ है। मानव के रक्त में लौह तत्व है। लौह तत्व का खिंचाव चुंबकीय क्षेत्र की तरफ होता है। शरीर का रक्त प्रवाह सिर से पैर की तरफ है इसलिए वास्तु शास्त्र में किस दिशा में सिर करके सोने का क्या महत्व है यह बताया गया है। महर्षि चरक के अनुसार निद्रा सुख पर र्निभर है।
 

पूर्व: पूर्व की दिशा को सूर्योदय होने की दिशा का सम्मान प्राप्त है। अगर सूर्योदय नहीं होगा तो पूरे विश्व की चर्याए निष्क्रिय हो जाएंगी। पूर्व की दिशा को विजय दिशा, ज्ञानोदय तथा शक्ति की दिशा भी कहा गया है। ज्ञानोदय के लिए विधार्थी, विद्वतजन, मानसिक रोगी को पूर्व दिशा में सिर रख कर सोना चाहिए।

दक्षिण: दक्षिण की तरफ सिर करके सोने वाले जातक को अच्छी नींद, स्वास्थ्य, लम्बी आयु प्राप्त होती है। दक्षिण की तरफ सिर करके सोते वक्त हमारे पैर उत्तर की तरफ होते हैं। उत्तरी ध्रुव चुम्बकीय शक्ति अपने पास रखता है।

पश्चिम: पश्चिम दिशा के लिए अनादि काल से विद्वानों में मतभेद चले आ रहे हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि गृहस्थ जब कोई प्रवास को जाता है तो उसे पश्चिम की ओर ही सिर करके सोना चाहिए। पश्चिम की ओर सिर करके सोने से श्र्वान निद्रा आती है। जिससे जातक सर्वदा स्वंय को सचेत रख सकता है।

उत्तर: विद्वानों का मत है कि उत्तर दिशा की तरफ सिर रखकर सोना निषेद्ध है क्योंकि उत्तर दिशा की तरफ सिर करके सोने से रक्त का प्रवाह विपरीत दिशा की ओर जाने का प्रयास करने लगता है। ऐसा लौह तत्व एवंम चुम्बकीय आकर्षण के कारण होता है।

नींद को बुलाने के साधारण तरीके: पलंग लकड़ी का हो, दीवार से लगा हुआ न हो, दुषित रूई का गद्दा न हो, कमरे का रंग मन को भाने वाला हो, बिजली का प्रकाश मध्यम हो, बिजली के उपकरण एवं स्विच पलंग से दूर हो, दर्पण का बिंब पलंग पर न पड़ता हो, मुख्य द्वार के सामने पलंग न हो, पलंग के सामने शौचालय का दरवाजा न हो, पलंग के ऊपर पिल्लर नही आना चाहिए, प्राकृतिक हवा का आगमन होना चाहिए।


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