स्वस्थ तन का निर्माण करता है हनुमान जी का मंत्र

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Tuesday, November 12, 2013-2:02 PM
किसी भी व्यक्ति के जीवन में पहला सुख स्वस्थ तन है, अगर हमारा तन ही स्वस्थ नहीं होगा तो हम अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ सकते। स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का निवास होता है। स्वस्थ रहने का अभिप्राय है स्वयं में स्थित होना। मन शरीर पर और शरीर मन पर निर्भर है। पवनपुत्र के निम्न मंत्र का जाप करने और पवन को रोकने से स्वस्थ तन का निर्माण होता है।
 
शरीर अस्वस्थ हो तो दायें-बायें नथुने से क्रमशः 10 बार श्वास लो और फिर छोड़ो। दोनों नथुनों से श्वास लेकर करीब 1 मिनट तक रोकते हुए मन-ही-मन हनुमान जी के इस इस मंत्र का जाप करें-

नासै रोग हरे सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।

फिर श्वास छोड़ो। अब 2-3 श्वास स्वाभाविक लो, फिर श्वास बाहर छोड़ो और 40 सेकेंड बाहर रोकते हुए फिर से बोलें

नासै रोग हरे सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।

दिन हो या रात किसी भी समय श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप करते रहें। ऐसा करने से वृद्धावस्था में होने वाले 80 प्रकार के वात-सम्बन्धी रोगों से निश्चिय ही आराम मिलता है।

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