बृहस्पति जी को देवगुरु पद किसने प्रदान किया

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Thursday, November 21, 2013-9:49 AM

पुराणों के अनुसार ब्रह्मा जी के मानस पुत्र अंगिरा ऋषि का विवाह स्मृति से हुआ। जिनसे सिनीवाली, कुहू, राका, अनुमति नाम कि कन्याएं एवं उतथ्य व जीव नामक पुत्र हुए। जीव बचपन से ही शांत एवम जितेन्द्रिय प्रकृति के थे | वे समस्त शास्त्रों तथा नीति के ज्ञाता हुए। अंगिरा नंदन जीव ने प्रभास क्षेत्र में शिवलिंग कि स्थापना कि तथा शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तप किया।

महादेव ने उनकी आराधना एवं तपस्या से प्रसन्न हो कर उन्हें साक्षात दर्शन दिए और कहा,“ हे द्विज श्रेष्ठ ! तुमने बहुत तप किया है। अतः तुम बृहस्पति नाम से प्रसिद्ध हो कर देवताओं के गुरु बनों और उनका धर्म व नीति के अनुसार मार्गदर्शन करो |”

इस प्रकार महादेव ने बृहस्पति को देवगुरु पद और नवग्रह मंडल में स्थान प्रदान किया। तभी से जीव, बृहस्पति और गुरु के नाम से विख्यात हुए। देवगुरु कि शुभा,तारा और ममता तीन पत्नियां हैं | उनकी तीसरी पत्नी ममता से भरद्वाज एवं कच नामक दो पुत्र हुए।

बृहस्पति ग्रह सब ग्रहों में सबसे अधिक वजनी और पृथ्वी से बहुत नज़दीक 37 करोड़ मील से भी कम दूरी पर हैं। इस ग्रह पर वायु नहीं है इसके धरातल पर हमेशा लावा फूटता रहता है इसलिए जो हमारे गुरुजन है उनके अन्दर जो ज्ञान रूपी लावा है वो हमारे कल्याण के लिए निरंतर बहता रहता है।

 


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