क्या आप परमात्मा की खोज करना चाहते हैं

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Saturday, November 30, 2013-10:10 AM
 

तीर्थों पर भ्रमण करने से, ग्रन्थ पोथियों के पाठ और विचार से मोह माया के भ्रम दूर नहीं होता। असली महिमा ग्रन्थ पोथियों का पाठ करने वालों की या तीर्थों पर भ्रमण करने वालों की नहीं है। अगर महिमा है तो केवल गुरूमुखों की मालिक के भक्तों और प्यारों की।

कैसे गुरूमुखों की महिमा है नाम की कमाई करने से उनकी होंमैं की, मोह माया की बीमारी दूर हो जाती है। उनका मन निर्मल हो जाता है जिसके फलस्वरूप वह गुरूमुख बन जाते हैं या यूं कहा जा सकता है वह सच्चे गुरूमुख हो जाते हैं और उनका जन्म मरण के दुखों से सदा के लिए छुटकारा हो जाता है।

शब्द और नाम की कमाई के बिना कोई उपाय नहीं है कि हम देह के बंधनों से छुटकारा पा सकें इसलिए सभी संत महात्मा केवल नाम का प्रचार एवं प्रसार करते हैं। वे हमारे ख्यालों को नाम के साथ जोड़कर हमें देह के बंधनों से आजाद करके वापिस उस परमात्मा के साथ मिला देते हैं।

संतों महात्माओं ने इस संसार को कर्मभूमि कहकर वर्णन किया है। जिस देह में बैठ कर हम कर्म करते हैं, उनको भोगने के लिए हमें बार बार चौरासी के जेल खाने में आना पड़ता है। अपने किए कर्मों को हर एक को भोगना पड़ता है लेकिन न कोई अच्छे कर्मों के कारण देह से आजाद हो सकता है और न ही बुरे कर्मों के कारण जन्म मरण के दुखों से बच सकता है।

गुरू अमरदास जी कहते हैं," हमारी आत्मा स्त्री है और परमात्मा उसका पति। जब तक यह आत्मा रूपी स्त्री परमात्मा रूपी पति के चरणों में नहीं पहुंचती, यह कभी सुहागिन नहीं हो सकती इसका कभी जन्म मरण के बंधनों से छुटकारा नहीं हो सकता इसलिए हम सब को परमात्मा की खोज है।"


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