ऐसा होने से घर में बरकत नहीं होती

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Tuesday, December 03, 2013-7:23 AM

झूठ और जूठ का मनुष्य के जीवन के साथ बहुत ही महत्वपूर्ण संबंध है। आज दुनियां में क्या हो रहा है। किसी से छिपा नहीं है। दुनियां में बहुत से लोग झूठ का सहारा लेकर अपनी जिंदगी जी रहे हैं परंतु यह सब से बड़ा पाप है। जिस कुदरत ने इन्सान को दुनियां में भेजा है उस के प्रति द्रोह है।

आज जगह जगह कुकर्म हो रहे हैं। आदमी अपना काम करवाने के लिए जगह जगह तथा समय समय पर झूठ का सहारा लेकर सभी कार्य कर रहा है परंतु वह भुल रहा है कि यह सब करके वह अपने जीवन में जहर घोल रहा है। दूसरों से घृणा ग्रहण कर रहा है। ईश्वर को धोखा दे रहा है। बड़े बड़े ग्रन्थों में लिखा है झूठ बोलना पाप है परंतु मनुष्य समझने को तैयार नहीं है दूसरे इंसान के जीवन में झूठ भी घर कर गई है। इसके होने से घर में बरकत नहीं होती। मनुष्य के जीवन में सब कुछ भगवान का दिया हुआ है।

जहां बड़े बड़े लंगर लोगों के सहयोग से लगाए जाते हैं। वहां लिखा होता है जूठ मत छोड़ना ऐसे लिखने का अभिप्राय है कि लंगर में बरकत बनी रहे। ऐसे ही घरों में नियम होना चाहिए। भोजन को परोसने से पहले उसे झूठा भी नहीं करना चाहिए। यदि मनुष्य जीवन में इन दो चीजों से परहेज करे तो वह भगवान का सच्चा शिष्य बन जाएगा।

कलियुग में सात्त्विक जीव का मिलना अत्यंत कठिन है जिन्हें अनिष्ट शक्ति का कष्ट न हो। अतः यथासंभव किसी का जूठन ग्रहण न करें किन्तु संतों का जूठन प्रसाद के रूप में अवश्य ग्रहण करें क्योंकि इस चैतन्यमय जूठन से देह की रिक्तियों की शुद्धि साध्य होती है।

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