मुख्‍य द्वार की सही दिशा लाए जीवन में खुशहाली

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Friday, January 24, 2014-8:24 AM

वास्तु में सबसे ज्यादा मतांतर मुख्य द्वार को लेकर है। अक्सर लोग अपने घर का द्वार उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहते हैं लेकिन समस्या तब आती है जब भूखंड के केवल एक ही ओर दक्षिण दिशा में रास्ता हो। वास्तु में दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार रखने को प्रशस्त बताया गया है। आप भूखंड के 81 विन्यास करके आग्नेय से तीसरे स्थान पर जहां गृहस्थ देवता का वास है, द्वार रख सकते हैं। द्वार रखने के कई सिद्धांत प्रचलित हैं जो एक दूसरे को काटते भी हैं जिससे असमंजस पैदा हो जाता है।


ऐसी स्थिति में सभी विद्वान मुख्य द्वार को कोने में रखने से मना करते हैं। ईशान कोण को पवित्र मान कर और खाली जगह रखने के उद्देश्य से कई लोग यहां द्वार रखते हैं लेकिन किसी भी वास्तु पुस्तक में इसका उल्लेख नहीं मिलता है। दूसरी समस्या लैट-बाथ की आती है क्योंकि जहां लैट्रिन बनाना प्रशस्त है वहां बाथरूम बनाया जाना वर्जित है। यहां ध्यान रखना चाहिए कि जहां वास्तु सम्मत लैट्रिन बने वहीं बाथरूम का निर्माण करें।

यानी लैट्रिन को मुख्य मान कर उसके स्थान के साथ बाथरूम को जोड़ें। यहां तकनीकी समस्या पैदा होती है कि लैट्रिन के लिए सैप्टिक टैंक कहां खोदें क्योंकि जो स्थान लैट्रिन के लिए प्रशस्त है वहां गड्ढा वर्जित है। ऐसे में आप दक्षिण मध्य से लेकर नैऋत्य कोण तक का जो स्थान है उसके बीच में अटैच लैट-बाथ बनाएं और उत्तर मध्य से लेकर वायव्य कोण तक का जो स्थान है उसके बीच सेप्टिक टैंक का निर्माण कराएं।


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