आज व्यक्ति के परेशान और दुखी होने का कारण....

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Tuesday, January 28, 2014-7:38 AM

जैसे हर तरफ से जल के समुद्र में समाने पर भी समुद्र में कोई बदलाव नहीं आता वैसे ही जो पुरुष इच्छाओं के लगातार आने से भी विचलित नहीं होता वही शांति को प्राप्त होता है, इच्छाओं को पूरा करने वाला नहीं। मन का अपना कुछ नहीं होता, यह काम तो हमारे आसपास का वातावरण करता है। वह हमारी इच्छाओं को जगाने और उसको बढ़ाने वाला होता है। जब मन को बाहर से कोई आनंद की चीज मिलती है तब वह उसके प्रभाव में आ जाता है। साथ ही जब दिमाग में कोई वासना उठती है तब भी मन उससे प्रभावित हो जाता है।
 
मतलब इच्छाएं मन में अंदर और बाहर दोनों ओर से आ ही रही हैं लेकिन जिसने मन को कंट्रोल किया है वह इच्छाओं को पूरा करने के लिए उनके पीछे नहीं भागता। जो केवल मन को ही महत्व देते हैं और जो मन में आता है वही करते रहते हैं, ऐसे लोगों को मन में उठने वाली इच्छाएं लगातार अपने कब्जे में रखती हैं और उसके दुखों का कारण बन जाती हैं। करीब से देखा जाए तो व्यक्ति के परेशान और दुखी होने का कारण उसकी अधूरी इच्छाएं ही हैं इसलिए मन में आने वाली इच्छाओं को पूरा करने में नहीं लग जाना चाहिए बल्कि मन के बहाव को शांत रखना चाहिए। ऐसा करने से ही जीवन सुंदर बन सकता है।

समुद्र की ही तरह, जिसके चारों ओर से पानी आकर उसमें मिलता रहता है लेकिन समुद्र में उसका कोई असर नहीं पड़ता, मन में आती इच्छाओं का असर भी हम पर नहीं पडऩा चाहिए।


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