ऐसे घर में बुरी शक्ति एवं नजर का प्रभाव नहीं होता

  • ऐसे घर में बुरी शक्ति एवं नजर का प्रभाव नहीं होता
You Are HereVastu Shastra
Saturday, February 01, 2014-8:05 AM

जीवन में सुख-समृद्धि और शांति पाने के लिए वास्तु शास्त्र में बहुत सी जानकारियों का वर्णन मिलता है। अगर आप अपने घर में  जीवन की सुखद अनुभूतियों को भोगना चाहते हैं तो....

शास्त्रों में घर को मन्दिर कहा गया है इसलिए घर का वातावरण सात्विक होना चाहिए। घर के अन्दर एवं बाहर साफ सफाई एवं स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए। घर में सुबह एवं शाम को मंदिर में  दीप, धूप और अगरबत्ती जलाएं। मंगलवार, वीरवार और शनिवार को गाय के गोबर के उपले पर गुग्गल जला कर उसका धुंआ पूरे घर में दें ऐसा करने से घर में कोई भी बुरी शक्ति प्रवेश नहीं कर पाती एवं नजर नहीं लगती।

घर में समय समय पर हवन, किर्तन, दान और धर्म कर्म के शुभ कार्य होते रहने चाहिए। इन समस्त क्रियाओं को करने से नकारात्मक ऊर्जाओं का शमन होता है। सकारात्मक ऊर्जाओं का आगमन होता है।

 जिस घर में आप निवास करते हैं उस भूमि का आकार आयताकार होना चाहिए वर्गाकार नहीं। श्री कृष्ण भगवान ने ब्रह्मवैवर्त्त पुराण में (श्री कृष्ण. 103/57) विश्वकर्मा के प्रति कहा है –

दीर्घे प्रस्थे समानंच, न कुर्य्यान्मन्दिरं बुधः. चतुरस्ते गृहे कारो, गृहिणां धननाशनम्।

अर्थात ज्ञानी व्यक्ति को चाहिए कि चौकोर घर में वास ना करें क्योंकि ऐसे घर में धन की हानि होती है।

घर में वरूण देवता अर्थात जल का स्थान उत्तर मध्य से ले कर पूर्व मध्य में होना चाहिए। ईशान कोण की सन्धि की जगह व्यवहार में नहीं लानी चाहिए। भूमि के अंदर टैंक, बोरिंग, कुआं, स्वीमिंग पूल के होने से घर के मालिक को समृद्धि एवं सफलता देने में अति सहायक है। छत पर रखी टंकी को नैऋत्य में न रख कर पश्चिम और दक्षिण में रखना उत्तम रहता है।  

 घर का फर्श बनाते वक्त फर्श की ढलान का विशेष रूप से ध्यान रखें। ढलान पूर्व और उत्तर में होने से कदम कदम पर सफलता की राहें स्वयं ही बनती जाती हैं। उत्तर ईशान के नजदीक पूर्वी, दक्षिणी अग्नि, पश्चिमी वायव्य में मुख्य द्वार बनाएं। घर की बाउण्ड्रीवॉल बनाते वक्त दक्षिण पश्चिम की बाउण्ड्रीवॉल मोटी और ऊंची रखें एवं उत्तर पूर्व की बाउण्ड्रीवॉल पतली और नीची। बाउण्ड्रीवॉल पर नुकीले भाले, कंटीले तार, छुभते हुए कांच मत लगाएं।

घर के मुख्य द्वार पर मांगलिक चिह्न बनाएं। ईशान कोण के नजदीक श्याम तुलसी और राम तुलसी के पौधे को विधि विधान से स्थापित करें। घर का देवालय ईशान कोण में बनाएं। रसोई अग्नि कोण में बनाएं। ट्रांसफार्मर, जेनेरेटर, इनवेटर, मेन स्वीच एवं अग्नि से संबंधित चीजें साउथ ईस्ट में लगवाएं।

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