पशुपतिनाथ मंदिर नेपाली एवं भारतीय स्थापत्य कला का सर्वश्रेष्ठ प्रतीक है

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Monday, February 03, 2014-7:50 AM

पशुपतिनाथ भगवान शिव का ही रूप हैं। पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल की राजधानी काठमांडू के पूर्वी भाग में बागमती नदी के किनारे पर स्थित है। नेपाल के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनने से पूर्व इस मंदिर को राष्ट्रीय देवता भगवान पशुपतिनाथ का मुख्य निवास माना जाता था। इस मंदिर को यूनेस्को विश्व सांस्कृतिक विरासत स्थल की सूची में सूचीबद्ध भी किया गया है।

पशुपतिनाथ में आस्थावानों (मुख्य रूप से हिंदुओं) को मंदिर परिसर में प्रवेश करने की अनुमति है। गैर हिंदू आगंतुकों बागमती नदी के दूसरे किनारे से इसे बाहर से देखने की अनुमति है। पुराणों में उल्लेख नेपाल के पशुपतिनाथ के संबंध में पुराणों में भी उल्लेख मिलता है। इस उल्लेख के अनुसार एक बार पांडव, केदारनाथ में भगवान शिव के दर्शन के लिए गए। भगवान शिव ने पांडवों को अपने ही सगोत्रियों की हत्या का दोषी माना एवं दर्शन देना अस्वीकार कर दिया।

पांडव भगवान शिव की आराधना एवं उनका पीछा करते रहे। पांडवों से पीछा छुड़ाने के लिए भगवान शिव ने भैसें (महिष) का रूप धारण किया और पृथ्वी के भीतर घुसने लगे। पांडवों ने इस महिष की पूंछ पकड़ ली पर तब तक भगवान शिव पृथ्वी के भीतर घुस चुके थे। उनका मुख रुद्रनाथ में, बांहें तुंगनाथ में, नाभि मदमहेश्वर में, जटा कल्पेशवर में तथा मस्तक बागमती नदी के दाएं किनारे पर स्थित कांतिपुर में प्रकट हुआ।

यह कांतिपुर नामक स्थान ही आज काठमांडू के नाम से जाना जाता है। काठमांडू नामकरण होने का कारण यह बताया जाता है कि इस शहर के मध्य में एक ही लकड़ी का एक विशाल काष्ठमंडप था। यह ‘काष्ठमंडप’ कालांतर में काठमांडू कहलाने लगा। काठमांडू में निर्मित भगवान पशुपतिनाथ का यह मंदिर पैगोडा शैली में है।

पशुपतिनाथ का यह विशाल मंदिर,चारों ओर से छोटे-छोटे मंदिरों और धर्मशालाओं से घिरा हुआ है। इस मंदिर के चार द्वार हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही विशाल प्रांगण दिखाई पड़ता है। मंदिर के द्वार चांदी के हैं। प्रांगण में कई हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तथा त्रिशूल की आकृतियां स्थापित हैं।

पशुपतिनाथ के मुख्य मंदिर के अहाते में नंदी की विशाल प्रतिमा है। मंदिर के शिखर सोने के बताए जाते हैं। मुख्य मंदिर नेपाली एवं भारतीय स्थापत्य कला का एक सर्वश्रेष्ठ प्रतीक कहा जा सकता है। मंदिर में स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा लगभग साढ़े तीन फुट ऊंची है। परिक्रमा एवं पूजन के लिए मंदिर में पर्याप्त स्थान है। भगवान पशुपतिनाथ की पूजा रुद्राक्ष एवं कमल-पुष्पों से की जाती है।


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