क्या आप माया के जंजाल से मुक्ति पाना चाहते हैं?

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Friday, February 07, 2014-8:19 AM

जहां हमारा मन जाकर बार-बार अटक जाता है, मन को कुछ खोने का डर और मिलने की आस लगी रहती है जो हमें सुखी-दुखी, मान-अपमान, लाभ-हानि, जय-पराजय देती है वही हमारी माया है। यानी किसी शख्स के संसार में उलझे रहने की वृत्ति का नाम माया है। माया अपनी कलाकारी से जीवों को खुद में उलझाकर जन्म-मरण के चक्र में बांधे रखती है। जब तक मन माया के जाल में फंसा रहता है, मुक्ति मुमकिन नहीं।

माया से ऊपर उठना मुक्ति है। संसार जितना दिखाई देता है वह और कुछ नहीं बल्कि माया का जाल है। माया की असली जगह इच्छा, वासना और अहंकार है। यह माया ही किसी शख्स को विकारों से ऊपर उठने नहीं देती। कोई संसार के जंजाल में ज्यादा उलझा है, कोई कम इसीलिए किसी की माया ज्यादा होती है, किसी की कम। अगर माया से ऊपर उठना है तो मन को निर्मल रखें क्योंकि विकारों से भरा मन माया से ऊपर नहीं उठ सकता। गुरु का सत्संग माया से ऊपर उठने में मदद करता है।

 


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