युवा वर्ग में नैतिकता तथा देशभक्ति आवश्यक : आचार्य नित्यानंद

  • युवा वर्ग में नैतिकता तथा देशभक्ति आवश्यक : आचार्य नित्यानंद
You Are HerePrerak Prasang
Friday, February 07, 2014-9:47 AM

शांति के अग्रदूत और समन्वय साधना के प्रतीक गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरिश्वर जी महाराज से साक्षात्कार में साहित्य रत्न डा. मुलखराज जैन तथा पंजाब केसरी के प्रतिनिधि देवेन्द्र जैन से हुए वार्तालाप के कुछ अंश:-

क्या धर्म को व्यावहारिक रूप दिया जा सकता है?
—धर्म केवल बाहर की क्रिया कांडों में नहीं अपितु यह व्यावहारिक ही है। असहाय की सेवा और ईमानदारी से कार्य करना ही धर्म है।
 
युवा वर्ग में बढ़ रहे नशों और धर्म के प्रति अरुचि क्यों है?
—युवा वर्ग को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है। उन्हें देश और समाज के प्रति समर्पण भावना की आवश्यकता है। इसके लिए हम सब को प्रयत्न करना होगा।
 
क्या राजनीति को धर्ममय होना चाहिए?

—राजनीति को धर्ममय अवश्य होना चाहिए। धर्ममय होने का अर्थ ईमानदारी और सच्चाई से काम करने से है न कि किसी धर्म विशेष के प्रति अनुराग से।

हम समाज में एकसुरता कैसे ला सकते हैं?
—समाज में एकसुरता सेवा भाव से लाई जा सकती है, जो लोग केवल अधिकार ही चाहते हैं वे समाज में एकसुरता कैसे ला सकते हैं ?
 
आप युवा वर्ग को क्या संदेश देना चाहते हैं ?
—हमारे युवक देश और समाज के निर्माता हैं। मेरे देश का युवक देशभक्त बने और अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहे, यही मेरा इन्हें संदेश है।

                                                                                                                                                  —प्रस्तुति : भूपेश जैन, लुधियाना


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You