इतने धनवान बनें कि कोई करोड़पति भी आपकी बराबरी न कर पाए

  • इतने धनवान बनें कि कोई करोड़पति भी आपकी बराबरी न कर पाए
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Sunday, February 23, 2014-6:37 AM

महाराज रविशंकर महीने में एक बार अपने राज्य के विभिन्न गांवों में अन्न बांटने जाया करते थे। एक बार वह अनाज बांटने पहुंचे तो उन्हें एक गरीब महिला मिली। महाराज ने उसे अनाज देने का प्रयत्न किया तो वह बोली, ‘‘महाराज, जब परमात्मा ने इतना बढिय़ा शरीर दिया है तो परिश्रम छोड़ कर मुफ्त का अन्न कैसे ग्रहण करूं?’’

 महाराज को उसकी यह बात बड़ी अच्छी लगी और उन्होंने उस महिला से पूछा, ‘‘आप आजीविका कैसे प्राप्त करती हैं?’’

महिला बोली, ‘‘महाराज, मैं युवावस्था में ही विधवा हो गई थी। अत: परिवार में कोई नहीं है। जंगल से लकड़ी काटती हूं और उसे बेच कर गुजारा कर लेती हूं।’’

महाराज ने उससे पूछा, ‘‘क्या आपके पति ने उसके लिए कोई जायदाद नहीं छोड़ी।’’

वह बोली, ‘‘उनकी तीस बीघा जमीन थी तो उसे बेच कर मैंने एक कुआं व हौदी बनवा दी। गांव की महिलाओं को दो-तीन मील पैदल जाकर पानी लाना पड़ता था।’’

उस विधवा के उत्सर्ग व त्याग की कहानी जानकर महाराज रविशंकर अत्यंत प्रभावित हुए और बोले, ‘‘तुम धन्य हो देवी, धन से न सही, पर मन से तो तुम इतनी धनवान हो कि कोई करोड़पति भी तुम्हारी बराबरी नहीं कर सकता।’’
 


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