घर में कैसे हो लक्ष्मी और करोड़ों देवताओं का निवास

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Friday, March 07, 2014-7:33 AM

हाथी के अंदर स्पर्श इन्द्रिय सुख बहुत प्रबल होता है। हथिनी को देखने मात्र से उसमें सुख भोग करने के लिए तीव्र इच्छा उत्पन्न हो जाती है। हाथी पकड़ने वाले लोग हाथी पकड़ने के लिए जंगल में बहुत बड़ा गढ्ढा करके उसे घास के सूखे तिनकों से ढक कर उसके ऊपर एक सुदंर कागज की हथिनी घड़ी कर देते हैं।

उसे देखकर हाथी स्पर्श सुख भोग करने के लिए जब भागा आता है तो विशाल गढ्ढे में गिरकर पुरूष के वशीभूत हो जाता है। तब वह उसे वहीं भूखा रखते हैं जब वह कमजोर हो जाता है तो अपने सिखलाए हुए हाथी से बांधकर उसे ले जाते हैं और इतने शक्तिशाली हाथी को अपना गुलाम बनाकर उससे कितने काम करवाते हैं।

स्त्री को कभी भी भोग्य रूप में स्वीकार न करें। श्री मद्भागवत में स्त्री संग के बारे में वर्णन है कि, जीवों और व्यक्तियों का संग करने से ऐसा मोह और बंधन नहीं होता जैसा की स्त्री एवं स्त्री संगी ( जो पुरूष अवैध स्त्री संग करता हो ) का संग करने से होता है।

वह भोग्य नहीं है बल्कि पुरुष को भी शिक्षा देने योग्य चरित्र बरत सकती है। अगर वह अपने चरित्र और साधना में दृढ़ तथा उत्साही बन जाय तो अपने माता, पिता, पति, सास और श्वसुर की भी उद्धारक हो सकती है इसलिए भक्ति मार्ग में पर स्त्रियों को माता के समान आदर व प्रणाम करने का विधान है।

स्त्री को माता के रूप में स्वीकार करके यह बात सिद्ध की है कि नारी पुरुष के कामोपभोग की सामग्री नहीं बल्कि वंदनीय, पूजनीय है। इससे साधकों को साधना में काफी आसानी हो जाता है क्योंकि इससे एक तो जीवों से घृणा करने का दोष नहीं होता और दूसरे पाप बुद्धि भी दूर हो जाती है।

नारी की महत्ता का वर्णन करते हुए महर्षि गर्ग कहते हैं-

यद् गृहे रमते नारी लक्ष्‍मीस्‍तद् गृहवासिनी।
देवता: कोटिशो वत्‍स ! न त्‍यजन्ति गृहं हितत्।।


जिस घर में सद्गुण सम्पन्न नारी सुख पूर्वक निवास करती है उस घर में लक्ष्मी जी निवास करती हैं। हे वत्स ! करोड़ों देवता भी उस घर को नहीं छोड़ते।
 


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