जानें अपने इष्ट देव को और पाएं मनोवांछित फल

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Friday, March 21, 2014-7:04 AM

जातक को पूजा-अर्चना सभी देवी-देवताओं की करनी चाहिए लेकिन इष्टदेव सिर्फ एक को ही बनाना चाहिए। मानव मन जिस भी देवी-देवता की लीलाओं से अधिक प्रभावित हो उसे उस देवता को अपना इष्ट देव बनाना चाहिए और उनका ध्यान करना चाहिए। जब भी कोई जातक धर्म कार्य, अनुष्ठान, जाप, दान आदि करें तो सर्वप्रथम अपने इष्ट देव की पूजा अराधना करनी चाहिए। अपने इष्ट देव का निर्धारण कर यदि आप नियमित पूजा अराधना करते हैं तो आपको अपने पूर्वजन्म कृत पापों से मुक्ति तो मिलती ही है साथ ही मनोवांछित फलों की भी प्राप्ती होती है।

अपनी राशि के अनुरूप करें अपने इष्टदेव की आराधना


मेष : हनुमान जी

वृषभ : दुर्गा मां

मिथुन : गणपति जी

कर्क: शिव जी

सिंह : विष्णु जी

कन्या : गणेश जी

तुला : देवी मां

वृश्चिक : हनुमान जी

धनु : विष्णु जी

मकर :
शिव जी

कुम्भ :
शिव जी का रूद्र रूप

मीन : विष्णु जी (सत्यनारायण भगवान)

जन्म वार के आधार पर
कुछ जातकों को अपने जन्म के समय का ज्ञात नहीं होता परंतु उनका जन्म किस दिन हुआ था उस वार के अनुसार वह अपना इष्ट देव चुन सकते हैं जैसे
 
रविवार-
विष्णु जी
              
सोमवार- शिव जी
            
मंगलवार- हनुमान जी

बुधवार-
गणेश जी
          
गुरूवार- शिव जी
            
शुक्रवार- देवी माता
                
शनिवार-
भैरव जी

जन्म माह के आधार पर

कुछ जातकों को केवल जन्म का माह ज्ञात होता है। वह अपना इष्ट देव चुन सकते हैं जैसे

- जनवरी या नवंबर महीने में पैदा हुए जातक शिव जी एवं गणेश जी की पूजा करें।

-फरवरी महीने में पैदा हुए जातक शिव जी की पूजा करें।

-मार्च व दिसंबर महीने में पैदा हुए जातक विष्णु जी की पूजा करें।

-अप्रेल, सितंबर और अक्टूबर महीने में पैदा हुए जातक गणेश जी की पूजा करें।

-मई व जून महीने में पैदा हुए जातक मां भगवती की पूजा करें।

-जुलाई महीने में पैदा हुए जातक विष्णु जी व गणेश जी की पूजा करें।


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