शनि देव के नाम पर भीख क्यों दी जाती है?

  • शनि देव के नाम पर भीख क्यों दी जाती है?
You Are HereDharm
Saturday, March 22, 2014-8:49 AM

शनि ग्रह को शनि देवता का प्रतीक रूप माना जाता है इसलिए शनि की उपासना के लिए शनि ग्रह के पूजन का विधान है। आधुनिक विज्ञान के ज्ञान से लोग प्रश्न किया करते हैं कि शनि ग्रह के पूजन से शनिदेव किस प्रकार प्रसन्न हो सकते हैं? शनि ग्रह की गति सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते अन्य ग्रहों की तुलना में बहुत कम है। इसलिए इन्हें शनैश्चर कहा गया है।

ज्योतिष के अनुसार शनि अपनी धीमी चाल के कारण जिस राशि में रहता है उसके 2.5 वर्ष, उसकी पूर्व की राशि के 2.5 और पश्चात की राशि के 2.5 वर्ष, इस प्रकार एक राशि पर कुल साढ़े सात वर्ष (7.5) वर्ष तक प्रभाव डालता है। इसे ही शनि की 'साढ़ेसाती' कहते हैं। शनि का प्रभाव भी उसकी राशि पर स्थिति के अनुसार वर्ष के क्रम में कठोर होता चला जाता है इसलिए शनि की साढ़ेसाती से लोग भयभीत रहते हैं ।

शनिवार के दिन चौराहों पर बहुत से बच्चे, जवान और बूढ़े जय शनिदेव कहते हुए भीख मांगते हुए नज़र आते हैं। हाथ में एक बर्तन के बीच सरसों का तेल, त्रिशूल, लोहे के शनिदेव, फूल माला, नींबू और हरी मिर्च की लड़ी बनाकर लटकाए होते हैं। आम जनमानस भी भय के कारण शनि के नाम पर भीख देते हैं। शनि खुश रहें, तो सब ठीक रहेगा। अमीर और गरीब दोनों ही शनि देव से डरते हैं। अमीर गरीब नहीं होना चाहता, गरीब अमीर होना चाहता है।

इस तरह शनि के नाम का कई लोग खाते हैं। शनि की ढैया से डराने वाले बहुत हैं और डरने वाले भी। शनि बहुत से लोगों की आजीविका चला रहे हैं। शनि का दान नहीं दोगे तो लोहे के चने चबवा देगें शनि। इस अंधविश्वास की आंधी और उससे असर ग्रस्त लोग शनि के प्रकोप की बात सोच कर ही दान देते हैं। आखिर ये लोग कौन हैं जो शनि के नाम पर भीख मांगते हैं ?

तुला,मकर और कुंभ राशि में शनि अत्यन्त शुभ फल देते हैं। मेष राशि में शनि के जबरदस्त दुष्परिणाम भोगने पड़ते हैं। कुल मिलाकर,शनि की श्रेणी निम्न मानी गई है। अधिकतर मामलों में वे कष्टदायी है इसलिए ऐसे देवता को दान एवं पुण्य कर्मों से ही प्रसन्न रखने का प्रयास किया जा सकता है।

 भारत देश में शनि देव को खुश रखने के लिए ये सब किया जाता है लेकिन क्या देश से बाहर दूसरे देशों के लोग जो इस बात में विश्वास नहीं रखते उनके साथ क्या शनि का प्रकोप अपना असर नहीं दिखाता? क्या सचमुच उन लोगों को इस अन्जाने भय से डर नहीं लगता?

शनिदेव एक ऐसे ग्रह हैं जो संतुलन एवं न्याय का प्रतीक माने जाते हैं।  शनिदेव न्याय अधिकारी बनकर पापों की सजा देकर उन्हें पवित्र कर सुख-सम्पत्ति एवं धन देते हैं। साढ़साती में यदि शनिदेव प्रतिकूल परिस्थितियों का संकेत देने वाले भाव में बैठे हैं तो हमारे प्रारब्ध या यिमाण कर्म में कहीं न कहीं त्रुटि जरूर रही है और उसका फल हमें साढ़ेसाती में अवश्य भुगतना होगा। ईश्वर एक ही है । ईश्वर और खुद में विश्वास हो तो डरने की ज़रुरत नहीं होती ।



 


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You