मौत के बाद भी है जिंदगी

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Saturday, March 29, 2014-10:46 AM

पुनर्जन्म का तात्पर्य है, ‘आत्मा की  पुर्नस्थापना’ यानी अगली जिन्दगी या आने वाली जिन्दगी। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि इस जन्म के कर्मों का फल हमें अगले जन्म में मिलेगा। मौत जिंदगी का अंत नहीं बल्कि यह तो एक पड़ाव है। एक ऐसा पड़ाव जहां से फिर शुरू होता है दूसरा जीवन

श्रीमद् भगवतगीता

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय,
 नवानि गृप्रातिनरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि संयाति नवानि देही ।। (अध्याय 2:22)

जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर नए वस्त्र ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीर को त्यागकर नए शरीर को प्राप्त होती है।

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावक:। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुत: ।। (अध्याय 2:23)

इस आत्मा को शस्त्र नहीं काट सकते, आग नहीं जला सकती, जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकती। आध्यात्मिक कानून के आधार पर पुनर्जन्म का तात्पर्य है आत्माओं की पुर्नस्थापना। इस तरह पुनर्जन्म का अर्थ हुआ अगली जिंदगी या आने वाली जिंदगी। पुनर्जन्म में हमारे पुराने कर्मों का बड़ा महत्व है। वेदों में कहा गया है कि आध्यात्मिक कानून के अनुसार पिछले जन्मों के बुरे कर्म हमें अपने नए जन्म में भोगने पड़ते हैं।
 
भगवद्गीता के अनुसार जिस प्रकार से मनुष्य अपने पुराने कपड़े उतार कर नए कपड़े पहनता है, ठीक उसी तरह मनुष्य की आत्मा भी पुराने शरीर को त्याग कर नया शरीर धारण करती है।  हमें कई ऐसे उद्धरण मिले हैं जहां लोगों ने अपने पुराने जन्म के बारे में बताया है। हालांकि, अधिकांश लोग मृत्यु के बाद जब नई योनि में जन्म लेते हैं तो वे अपने पुराने जन्म के बारे में सब कुछ भूल जाते हैं। हमें पिछले जन्म की बातें याद नहीं होतीं लेकिन वर्तमान जन्म में अच्छे कार्य करके आने वाले जन्म को सुखमय बना सकते हैं।


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