आज से बदलेगी ब्रह्मांड की सत्ता, नव संवत्सर प्लवंग का शुभारंभ

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Monday, March 31, 2014-10:31 AM

चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, दिन सोमवार तद्नुसार 31 मार्च 2014 को नए संवत् श्री विक्रमी संवत् 2071 का शुभ आरंभ होगा। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए संवत् का आरंभ होता है, अत: इस दिन को स्वयं सिद्ध मुहूर्त भी माना जाता है।

शास्त्र अनुसार इस दिन किए गए व्रत-जप-तीर्थ स्नान-दान-होमादि का फल अति उत्तम माना गया है। इस दिन अपने घर को धर्म-ध्वजा-तोरण आदि से सुशोभित करें। अपने-अपने धर्म अनुसार मंगल पाठ एवं पूजा-दान आदि करें। गाय सेवा करना बहुत ही शुभ होता है। यथाशक्ति दान करें। वर्ष आरंभ का दिन आनंदपूर्वक प्रारंभ करें।

 इन नवरात्रों में मां दुर्गा पूजा का विशेष महात्मय कहा गया है। ‘प्लवंग’ नामक संवत् का राजा एवं मंत्री दोनों पद चंद्रमा को ही प्राप्त हुए हैं। यदि संवत् का राजा चंद्रमा हो तो सर्वत्र खुशहाली दिखती है, आर्थिक-औद्योगिक विकास, प्रशासनिक नियंत्रण से कल्याणकारी एवं शुभ कार्यों में सुगमता, विश्व में शांति हेतु प्रयासों में सार्थक कदम उठेंगे, स्त्रियों का सम्मान-प्रभाव बढ़ेगा, चावल, गेहूं, वनस्पति, तिलहन, दालें-धान्य, फल-फूल आदि अनाजों में वृद्धि होगी।

वर्ष का मंत्री भी चंद्रमा होने से वर्षा की अधिकता रहेगी, जनजीवन में सुख-ऐश्वर्य का संचार बढ़ेगा, रूई, कपास, गुड़, गन्ना, चीनी, दूध, शक्कर आदि सफेद वस्तुओं की पैदावार अच्छी होती है परंतु राजा एवं मंत्री के दोनों ही अधिकार एक ही ग्रह को मिलने से शास्त्रों में इसका फल शुभ नहीं माना गया। अत: उपरोक्त शुभफलों के साथ-साथ रोग, कष्ट, चोरी, हिंसा, अग्रिकांड, समुद्री तूफान, कुदरती आफत से समाज में अशांति का माहौल रहेगा। संवत् का वास ‘वैश्य’ के घर में, रोहिणी का वास संधि तथा वाहन ‘मृग’ है। इस वर्ष धनेश बुध, रसेश-शुक्र, मेधेश सूर्य, सस्येश बुध, धान्येश मंगल, फलेश शनि तथा दुर्गेश का पद सूर्य को हासिल है। प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत रहेगी, विश्व स्तर पर राष्ट्र की पहचान बढ़ेगी, व्यापारी वर्ग को लाभ के अवसर मिलेंगे, प्रजा में धर्म स्नेह आदि का उभार प्रभाव बढ़ेगा, आयात-निर्यात एवं मुद्रा स्थिति पर नियंत्रण के प्रयास सफल होंगे।।
इस संवत् में कुल पांच ग्रहण लगेंगे।  जिनमें से 8 अक्तूबर 2014 को लगने वाला ‘खग्रास चंद्र ग्रहण’ ही भारत में दिखाई देगा, जबकि अन्य चार ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देंगे।

इस संवत् के दौरान केवल एक ही सोमवती अमावस 25 अगस्त 14 को पड़ रही है। 29 अप्रैल 14 एवं 20 जनवरी 2015 को भौमवती अमावस, 26 जुलाई एवं 22 नवम्बर को शनैश्चरी अमावस होगी। यदि अमावस सोमवार, मंगलवार एवं गुरुवार की हो तो इस योग को पुष्कर योग कहते हैं, जिसमें किए गए तीर्थ स्नान, यात्रा, जप, दान, होम, अनुष्ठान आदि का अनंतगुणा फल कहा गया है। इस वर्ष 23 अक्तूबर 2014 को कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस वीरवार को पड़ रही है। दीवाली के दिन वीरवार की अमावस होने से इस रात्रि को किए गए अनुष्ठान, जप, होम, दान, तप, तीर्थ स्नान एवं यात्रा तथा मंत्र आदि का फल एवं महत्व और भी अधिक होगा।

18 अक्तूबर से 27 नवम्बर तक मंगल गुरु का तथा 6 दिसम्बर से 29 दिसम्बर 2014 तक गुरु-शुक्र का षड़ाष्टक योग रहेगा। इस दौरान दोनों ग्रह एक दूसरे से छठी-आठवीं राशि में होंगे। राजनीतिक उथल-पुथल एवं प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी, अत्यधिक महंगाई, भ्रष्टाचार, राजनेताओं में परस्पर विरोध, टकराव एवं तनाव रहेगा। बाढ़, कुदरती आफत, अग्रिकांड, कहीं-कहीं सूखा, वर्षा की अधिकता, बादल फटने, भूस्खलन, भारी हिमपात एवं हिमस्खलन आदि से नुक्सान का भय बना रहेगा। मनोरंजन, फिल्म, क्षेत्र में परेशानियां आएंगी।

नव संवत् भारतवर्ष एवं समस्त प्राणिजाति के लिए शुभ-मंगल-सुखी एवं कल्याणकारी हो-ऐसी भावना से ईश्वर से प्रार्थना करें।
                                                                                                                                                             —पं. कुलदीप शर्मा


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