सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करें चंद्रघंटा उपासना

  • सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करें चंद्रघंटा उपासना
You Are HereDharm
Wednesday, April 02, 2014-7:54 AM

या देवी सर्वभू‍तेषु चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।


अवतार वर्णन
: पौराणिक मत अनुरूप नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप में मां चंद्रघंटा की पूजा करी जाती है। आदिशक्ति दुर्गा का तृतीय स्वरूप उपासक के जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को समाप्त करने वाला है। इनकी साधना से उपासक को सुख, सुविधा, धन, ऐश्वर्य, प्रेम, काम, सांसारिक सुख, सुखी ग्रहस्थ जीवन और सम्पन्नता प्राप्त होती है । शब्द चंद्रघंटा का संधिविच्छेद कुछ इस प्रकार है के चंद्र का अर्थ है चंद्रमा और घंटा कर का अर्थ है ध्वनि करने वाला घंटाकर्ण अर्थात जिन देवी के मस्तक पर घंटा (घंटीनुमा) आकार का चंद्रमा विराजमान है वही हैं मां चंद्रघंटा ।

स्वरुप वर्णन:
मां चंद्रघंटा का स्वरूप चमकते हुए तारे जैसा है जैसे के इनके शरीर से अग्नि निकल रही हो । शास्त्रों में मां चंद्रघंटा के रूप का वर्णन युद्ध में डटे हुए योद्धा की भांति बताया गया है और इन्हें वीर रस की देवी कहकर संबोधित किया गया है । मां का यह स्वरूप परम शक्तिशाली और वैभवशाली है। इनके मस्तक में घंटे के आकार का अर्धचंद्र है । इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग,अक्षमाला,धनुष, बाण, कमल, त्रिशूल, तलवार, कमण्डलु, गदा, शंख, बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं तथा हाथ हाड वरद मुद्रा में हैं । इनका वर्णन सिंह पर सवार देवी के रूप में किया गया है। इनके गले में पुष्पमाला है । ये अनेक प्रकार के रत्नों से सुशोभित हैं।

साधना वर्णन:
मां चंद्रघंटा की पूजा प्रेम, ऐश्वर्य और विवाह की प्राप्ति के लिए की जाती है । इनकी पूजा का सबसे अच्छा समय हैं गौधूलि बेला शाम को 5 बजे से 6 बजे के बीच, इनकी पूजा गुलाबी रंग के फूलों से करनी चाहिए । इन्हें दूध चावल से बनी खीर का भोग लगाना चाहिए तथा श्रंगार में इन्हें सुगंधित द्रव्य इत्र अर्पित करना शुभ होता है । इनका ध्यान इस प्रकार करें

 वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्धकृत शेखरम् । सिंहारूढा चंद्रघंटा यशस्वनीम्॥


योगिक दृष्टिकोण:
चंद्रघंटा साधना के लिए साधक अपने मन को “मणिपूर  चक्र” में स्थित करते हैं।  इनको साधने से दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है तथा विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियां सुनाई देती हैं। साधक के शरीर से अदृश्य उर्जा का विकरण होता रहता है जिससे वह जहां भी होते हैं वहां का वातावरण पवित्र और शुद्ध हो जाता है।

ज्योतिष दृष्टिकोण:
मां चंद्रघंटा की साधना का संबंध शुक्र ग्रह से है । कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में शुक्र का संबंध दूसरे और सातवें घर से होता है। अतः मां चंद्रघंटा की साधना का संबंध व्यक्ति के सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता, सुविधाएं, प्रेम, कामनाएं, संभोग और सुखी ग्रहस्थ जीवन से है । जिन व्यक्तियों की कुण्डली में शुक्र नीच, अस्त अथवा राहू यां मंगल से पीड़ित हो रहा है अथवा कन्या राशि में आकार नीच एवं पीड़ित है उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है मां चंद्रघंटा की आराधना । मां चंद्रघंटा की आराधना से अविवाहितों का शीघ्र विवाह होता है । प्रेम में सफलता मिलती है । काम सुख में बढ़ोत्तरी होती है और वैवाहिक जीवन का पूर्ण सुख प्राप्त होता है । जिस व्यक्ति की आजीविका का संबंध सौंदर्य (मोडल्स और ब्यूटीशियनस्), कला (पेंटर्स और एक्टर्स) अथवा होस्पिटेलिटी सर्विसेज (होटल और रेस्टोरेंट) सेवा से हो उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है मां चंद्रघंटा की साधना ।

वास्तु दृष्टिकोण: मां चंद्रघंटा कि साधना का संबंध वास्तुपुरुष सिद्धांत के अनुसार अग्नि तत्व से है, इनकी दिशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) है, निवास में बने वो स्थान जहां पर आग से संबंधित काम होता हो अथवा खाना बनता हो जैसे के रसोईघर (किचन) । जिन व्यक्तियों का घर दक्षिण-पूर्व मुखी हो अथवा जिनके घर का दक्षिण-पूर्वी कोना प्रभ्वावित हो उन्हें सर्वश्रेष्ठ फल देती है मां चंद्रघंटा की आराधना ।

उपाय:
प्रेम और विवाह में सफलता के लिए मां चंद्रघंटा पर कमलगट्टे अर्पित करें ।

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: info@kamalnandlal.com


विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में  निःशुल्क  रजिस्टर  करें !

Recommended For You