...तो इसलिए नवरात्रों में श्रद्धालु आते हैं ज्वालामुखी मंदिर

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Tuesday, April 08, 2014-10:53 AM

 विश्व विख्यात शक्ति पीठ श्री ज्वालामुखी मंदिर में नौ नवरात्रों के शुभ अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र ज्योति के दर्शन किए और जैकारे भी लगाए । इन नवरात्रों में मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के सभी पुख्ता प्रबंध किए हुए थे । आज माता के नवम रूप सिद्धिदात्री माता कि पूजा की जाती है । सिद्धि व् मोक्ष को देने वाली मां का नाम सिद्धिदात्री है।

दुर्गा मां ने जगत के कल्याण हेतु नौ रूपों में प्रकट हुई और इन रूपों में अंतिम रूप है देवी सिद्धिदात्री का। नवरात्रि-पूजन के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। नवमी के दिन सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्रकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां होती हैं। देवी पुराण के अनुसार भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से सिद्धियों को प्राप्त किया था। इन्हीं की अनुकम्पा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इसी कारण वह संसार में अर्द्धनारीश्वर नाम से प्रसिद्ध हुए।

विश्व विख्यात ज्वालामुखी मंदिर में समस्त नवरात्रों में हजारों श्रद्धालुओं ने ज्वाला मां के दर्शन किए और मां ज्वाला का आर्शीवाद प्राप्त किया। पंजाब, हरियाणा, यू.पी, दिल्ली,बिहार और अन्य प्रदेशों से भरी संख्या में भक्तों का तांता लगा रहा।

मंदिर अधिकारी का कहना है कि इन नवरात्रों में श्रद्धालुओं द्वारा 38 लाख रुपए, सोना 45 ग्राम व् चांदी 2 किलो के लगभग मां ज्वाला के चरणों में अर्पित किए गए हैं। इन नवरात्रों में मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं कि सुविधा के लिए तीन वक्त के लंगर का भी प्रबंध किया गया है और मेडिकल कैंप का आयोजन भी मंदिर प्रशासन की तरफ से लगाया गया जिसमें दवाइयां बिल्कुल मुफ्त दी जाती है ।

श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर प्रशासन ने उनकी सुविधा के लिए सभी प्रबंध किए हुए थे । उन्होंने कहा कि माता ज्वाला जी के दर्शन करके उन्हें बहुत अच्छा लगा और माता रानी उनकी सभी मनोकामनाएं पूरा करती हैं। इसलिए वो हर साल नवरात्रों में दर्शन करने आते हैं ।


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