बैसाखी आज: संक्रांति के साथ होगा मेलों का आरंभ, किसानों की मेहनत लाएगी रंग

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Wednesday, April 12, 2017-8:03 AM

बैसाखी पर्व का हमारी संस्कृति में एक विशेष महत्व है। बैसाखी शब्द सुनते ही जहां एक तरफ उत्साह और उमंग से भरा वातावरण अवलोकित होता है, वहीं दूसरी ओर सन् 1919 में इसी दिन अमृतसर में जलियांवाला बाग में क्रूर जनरल डायर ने हजारों निर्दोष भारतीयों को गोलियों से भून दिया था, उन भारतवासियों की शहादत की याद दिलाता है यह पर्व। इस दिन आकाश में बिशाखा नक्षत्र होने के कारण इस महीने का नाम बैसाख पड़ा तथा इस पर्व के इस माह में आने के कारण इसका नाम ‘बैसाखी’ पड़ा। ‘पद्म पुराण’ में बैसाख माह को माधव-माह भी कहा जाता है। इन दिनों कई बड़े तीर्थों पर कुंभ का आयोजन भी होता है। इस पर्व का सीधा संबंध सूर्य से भी माना गया है। बैसाखी हर वर्ष 13 या 14 अप्रैल को पड़ती है। इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है इसीलिए कई स्थानों पर मेले लगते हैं और लोग पवित्र सरोवरों में स्नान करते हैं।


शरद ऋतु के समाप्त होने व होली के रंग छंट जाने के बाद इस समय आम के पेड़ मंजरियों से लदे होते हैं, वृक्षों से एक अद्भुत सुगंध आती है और मैदानी भागों में दूर-दूर तक खेतों में गेहूं की बालियां लहलहाती नजर आती हैं। किसानों की छ: महीने की कठोर मेहनत गेहूं की फसल के रूप में फलती दिखती है और यह मनोरम दृश्य किसानों को सबसे अधिक खुशी देने वाला होता है।

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