सोच और इंसानियत को खत्म करती है ऐसी हरकत, कहीं आप इसके गुलाम तो नहीं

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Monday, November 14, 2016-1:38 PM

एक बार एक गांव से दो लड़के शिष्य बनने के लिए गुरु के आश्रम में आए। गुरु जी ने उनसे कहा कि मैं तुम्हें अपना शिष्य बना लूंगा लेकिन तुम्हें मेरा एक काम मेरे नियमों के द्वारा करना पड़ेगा। दोनों लड़कों ने गुरु जी की बात मान ली, तब गुरु जी ने एक भेड़ की तरफ इशारा करके कहा कि जाओ ऐसा स्थान ढूंढ कर आओ जहां इस भेड़ को मारा जा सके और कोई देखने वाला न हो।


तब दोनों लड़के गुरु जी की आज्ञानुसार जंगल में वह जगह ढूंढने के लिए चले गए जहां पर भेड़ को मारा जा सके और कोई देख न सके। बहुत समय कोशिश करने पर पहले लड़के को एक गुफा मिली जहां घना अंधेरा व सन्नाटा था। उस लड़के ने सोचा कि यही स्थान भेड़ को मारने के लिए उचित रहेगा क्योंकि यहां कोई देखने वाला नहीं है। 


दूसरा लड़का भी ऐसा ही स्थान ढूंढने की कोशिश कर रहा था जहां कोई देखने वाला न हो लेकिन उसे वह स्थान मिल नहीं पा रहा था क्योंकि वह जहां भी जाता वहां उसे कोई न कोई पक्षी या जानवर या कोई व्यक्ति मिल ही जाता। अंत में उसे वही गुफा नजर आई जहां पहला लड़का गया था उसने कुछ देर उस गुफा को देखा और वापस गुरु जी के आश्रम चला गया।


जब दोनों गुरु के पास वापिस गए तो गुरु ने पूछा, ‘‘क्या तुम वह जगह ढूंढ कर आ गए जहां पर इस भेड़ को मारा जा सके और कोई देखे न?’’


पहले लड़के ने कहा, ‘‘मुझे एक गुफा मिली है जहां घना अंधेरा है और उस जगह पर कोई भी देखने वाला नहीं है।’’


गुरु ने दूसरे लड़के को पूछा, ‘‘क्या तुम्हें कोई स्थान नहीं मिला?’’ 


दूसरे लड़के ने कहा, ‘‘गुरु जी मुझे क्षमा कर दीजिए क्योंकि मैं उस जगह को ढूंढने में असफल रहा जहां इस भेड़ को मारा जा सके।’’


गुरु ने कहा, ‘‘क्या तुम्हें वह गुफा नहीं मिली?’’


लड़के ने उत्तर दिया, ‘‘मुझे वह गुफा मिली थी लेकिन उस स्थान पर इस भेड़ को नहीं मारा जा सकता क्योंकि उसे मारते समय मेरी आत्मा देख रही होगी। गुफा का घना अंधेरा देख रहा होगा, शांत हवाएं देख रही होंगी, परम पिता परमेश्वर देख रहे होंगे और तो और यह भेड भी देख रही होंगी। इस कारण वह गुफा तो क्या पूरी दुनिया में कोई भी ऐसा स्थान नहीं होगा जो इस कार्य के लिए उचित हो अगर कोई ऐसा स्थान होता भी तो भी आपका यह काम नहीं कर पाऊंगा क्योंकि किसी भी जीव-जंतु को मारने का अधिकार किसी को भी नहीं है। अगर मैं इस भेड़ को मारता हूं तो मैं अपनी सोच और इंसानियत को खत्म कर दूंगा,’’


यह बात सुन कर गुरु जी ने उसे अपने गले से लगा लिया और आजीवन उसे शिष्य बना लिया।


 


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